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सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित? प्रताड़ना के चलते लौट रहीं महिलाएं

Bangladeshi Women:

Bangladeshi Women: सऊदी अरब में एक महिला समेत दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने की खबर के बाद बांग्लादेश में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस घटना के बीच सऊदी अरब में काम करने वाली बांग्लादेशी महिला कामगारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, वेतन नहीं मिलने और यौन उत्पीड़न जैसी समस्याओं के कारण कई महिला कामगारों को अपना काम छोड़कर स्वदेश लौटना पड़ रहा है।

Bangladeshi Women: सऊदी अरब में काम करने जाती हैं बड़ी संख्या में महिलाएं

पिछले दो वर्षों में बांग्लादेश से विदेशों में काम करने गईं महिला कामगारों में सबसे बड़ी संख्या सऊदी अरब जाने वाली महिलाओं की है। इसके बाद जॉर्डन का स्थान आता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2024 से अक्टूबर 2026 के मध्य तक बांग्लादेश से 1 लाख 72 हजार से अधिक महिला कामगार विदेश गईं। इनमें से करीब 1 लाख 20 हजार महिलाएं सऊदी अरब पहुंचीं। ये आंकड़े बताते हैं कि रोजगार के लिए विदेश जाने वाली बांग्लादेशी महिलाओं के बीच सऊदी अरब एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है।

Bangladeshi Women: सितंबर से अब तक 1,500 से अधिक महिलाएं लौटीं

इस साल सितंबर से अक्टूबर के मध्य तक 1,500 से अधिक महिला कामगार अपने देश लौट चुकी हैं। इनमें से करीब 1,000 महिलाएं सऊदी अरब से वापस आई हैं। महिला कामगारों की वापसी ने विदेशों में उनके कामकाजी हालात और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि स्वदेश लौटने वाली सभी महिलाएं किन परिस्थितियों में वापस आईं।

प्रताड़ना और यौन उत्पीड़न भी वापसी की वजह

विदेश से लौटने वाली महिला कामगारों के साथ काम करने वाले संगठनों का कहना है कि शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, वेतन नहीं मिलना या पूरा वेतन नहीं मिलना और यौन उत्पीड़न उनकी वापसी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इन समस्याओं के कारण कई महिलाओं के लिए विदेश में रोजगार जारी रखना मुश्किल हो जाता है। रोजगार की तलाश में दूसरे देश जाने वाली महिलाओं को कामकाजी परिस्थितियों और अपने अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

90 फीसदी महिलाओं ने बताई प्रताड़ना की वजह

माइग्रेंट वर्कर्स डेवलपमेंट प्रोग्राम (ओकेएपी) के अध्यक्ष शाकिरुल इस्लाम ने इस समस्या को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि हर साल कितनी महिलाएं विदेश में मुश्किल हालात का सामना करने के बाद मजबूरन अपने देश लौटती हैं, इसका पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। शाकिरुल इस्लाम ने बीबीसी बांग्ला से बातचीत में बताया कि पिछले साल जुलाई में स्वदेश लौटी महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में सामने आया कि 90 फीसदी महिलाओं ने शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण वापस लौटने की बात कही थी।

यह अध्ययन विदेशों में काम करने वाली बांग्लादेशी महिला कामगारों की परिस्थितियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह आंकड़ा अध्ययन में शामिल महिलाओं से संबंधित है और इसे विदेश से लौटने वाली सभी महिलाओं पर लागू नहीं किया जा सकता।

महिला कामगारों की सुरक्षा बनी चिंता का विषय

सऊदी अरब में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी महिलाओं का रोजगार के लिए जाना और उनमें से कई का वापस लौटना उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। वेतन संबंधी समस्याएं, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना तथा यौन उत्पीड़न की शिकायतें इस बात की ओर ध्यान दिलाती हैं कि विदेशों में महिला कामगारों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करना कितना महत्वपूर्ण है। महिला कामगारों की वापसी से जुड़े आंकड़ों और संगठनों के दावों के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विदेश में काम करने जाने वाली महिलाओं को प्रताड़ना से बचाने और मुश्किल परिस्थितियों में उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

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