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अमित शाह की राजनीति के पीछे की कहानी: शुरुआती जीवन से गृह मंत्री बनने तक का सफर, जानिए पूरा सियासी सफर

Amit Shah Birthday Explainer: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव, छात्र राजनीति में सक्रियता, गुजरात में संगठन का विस्तार और फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से केंद्रीय गृह मंत्री तक का सफर। अमित शाह की राजनीतिक यात्रा कई अहम पड़ावों से होकर गुजरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले शाह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की रणनीति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। 2019 में गृह मंत्री बनने के बाद अनुच्छेद 370 में बदलाव और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) जैसे फैसलों में उनकी अहम भूमिका रही। 22 अक्टूबर को उनके जन्मदिन पर समझिए कि अमित शाह ने राजनीति में शुरुआत कैसे की, भाजपा में उनका कद कैसे बढ़ा और उनके कार्यकाल के कौन-से फैसले चर्चा में रहे।

सवाल 1: अमित शाह का जन्म कहां हुआ और शुरुआती जीवन कैसा रहा?

अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम अनिलचंद्र शाह और मां का नाम कुसुमबेन शाह है। उनका परिवार मूल रूप से गुजरात से जुड़ा था। अमित शाह ने अपने जीवन के शुरुआती वर्ष गुजरात के मानसा में बिताए। बाद में उनका परिवार अहमदाबाद आ गया। उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से बीएससी के दूसरे वर्ष तक पढ़ाई की। संसदीय परिचय में उनकी शैक्षणिक योग्यता का यही उल्लेख है। युवावस्था में ही उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव हुआ। इसके बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की गतिविधियों में सक्रिय हुए। यहीं से उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक यात्रा ने गति पकड़ी।

Amit Shah Birthday Explainer: सवाल 2: अमित शाह ने राजनीति में कदम कैसे रखा?

अमित शाह ने छात्र और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए राजनीति की शुरुआत की। RSS से जुड़ने के बाद वे ABVP में सक्रिय हुए और आगे चलकर भाजपा के संगठन में काम करने लगे। 1980 के दशक में भाजपा से जुड़ने के बाद उन्होंने अहमदाबाद में पार्टी की गतिविधियों और चुनावी अभियानों में जिम्मेदारियां संभालीं। धीरे-धीरे उनकी पहचान एक ऐसे संगठनकर्ता के रूप में बनने लगी, जो चुनावी प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क पर ध्यान देता था। 1990 के दशक में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के चुनाव अभियानों में भी काम किया। इनमें लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव अभियानों से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल थीं। इन अनुभवों ने उन्हें पार्टी संगठन और चुनावी रणनीति की बारीकियां समझने का अवसर दिया।

सवाल 3: गुजरात की राजनीति में अमित शाह का कद कैसे बढ़ा?

अमित शाह का राजनीतिक आधार गुजरात में मजबूत हुआ। वर्ष 1997 में वे पहली बार गुजरात विधानसभा के उपचुनाव में जीतकर विधायक बने। इसके बाद उन्होंने सरखेज विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव जीते। 2012 में वे नारनपुरा विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। 2002 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार में अमित शाह को गृह राज्य मंत्री बनाया गया। उन्होंने गृह, पुलिस, परिवहन, कानून और आबकारी समेत कई विभागों की जिम्मेदारियां संभालीं। इस दौरान वे राज्य की राजनीति में प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। राजनीति के अलावा शाह ने सहकारी बैंकिंग और खेल प्रशासन के क्षेत्र में भी काम किया। वे अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे। इन जिम्मेदारियों के जरिए उनका संपर्क राजनीतिक संगठन से बाहर के संस्थानों और विभिन्न वर्गों से भी बढ़ा।

Amit Shah Birthday Explainer: सवाल 4: मोदी के साथ शाह की राजनीतिक साझेदारी कैसे मजबूत हुई?

अमित शाह और नरेंद्र मोदी की राजनीतिक साझेदारी गुजरात की राजनीति के दौरान मजबूत हुई। दोनों ने पार्टी संगठन और चुनावी अभियानों में साथ काम किया। मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद शाह की राजनीतिक भूमिका भी बढ़ती गई। हालांकि, राष्ट्रीय राजनीति में अमित शाह की पहचान 2013 में भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने के बाद तेजी से बढ़ी। उस समय उत्तर प्रदेश लोकसभा की 80 सीटों के कारण केंद्र की सत्ता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण राज्य था। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगियों ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 सीटें जीतीं। इस प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजनीति में अमित शाह की संगठनात्मक क्षमता को चर्चा के केंद्र में ला दिया। चुनाव के बाद जुलाई 2014 में वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

Amit Shah Birthday Explainer
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सवाल 5: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अमित शाह ने क्या भूमिका निभाई?

जुलाई 2014 में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अमित शाह ने पार्टी के संगठनात्मक विस्तार पर जोर दिया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कई राज्यों में चुनावी अभियान चलाए और संगठन को मजबूत करने की कोशिश की।

2014 से 2019 के बीच भाजपा ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, असम और अन्य राज्यों में चुनावी सफलता हासिल की या सरकार बनाने में भूमिका निभाई। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों, गठबंधनों और नेतृत्व समेत कई कारकों पर निर्भर रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने फिर बहुमत हासिल किया। अमित शाह ने गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़कर केंद्र सरकार में गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।

Amit Shah Birthday Explainer: सवाल 6: अमित शाह गृह मंत्री कार्यकाल के बड़े फैसले कौन-से रहे?

अमित शाह ने 1 जून 2019 को केंद्रीय गृह मंत्री का पदभार संभाला। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बनी नरेंद्र मोदी सरकार में भी उन्हें गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। वे सहकारिता मंत्रालय का नेतृत्व भी कर रहे हैं।

उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले हुए, जिनमें प्रमुख हैं:

1. अनुच्छेद 370 में बदलाव

अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में पुनर्गठित करने का कदम उठाया। इस प्रक्रिया में अमित शाह ने संसद में सरकार का पक्ष रखा। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय एकीकरण से जुड़ा कदम बताया, जबकि विरोध करने वाले दलों और नेताओं ने इसके संवैधानिक तथा राजनीतिक पहलुओं पर सवाल उठाए।

2. नागरिकता संशोधन कानून (CAA)

दिसंबर 2019 में संसद ने नागरिकता संशोधन कानून पारित किया। इस कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के पात्र लोगों के लिए नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया में विशेष प्रावधान किए गए। सरकार ने इसे पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले अल्पसंख्यकों को राहत देने वाला कदम बताया। वहीं, आलोचकों ने कानून में धर्म के आधार पर किए गए वर्गीकरण और इसके संवैधानिक प्रभावों पर सवाल उठाए।

3. सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी

जुलाई 2021 में अमित शाह ने नवगठित सहकारिता मंत्रालय का कार्यभार संभाला। इस मंत्रालय का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र से जुड़े संस्थानों और गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इन फैसलों ने अमित शाह को केंद्र सरकार के प्रमुख निर्णयकर्ताओं में शामिल किया। इनके प्रभावों और राजनीतिक-सामाजिक परिणामों को लेकर अलग-अलग विचार रहे हैं।

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सवाल 7: अमित शाह के राजनीतिक सफर में विवाद भी क्यों चर्चा में रहे?

अमित शाह का राजनीतिक सफर चुनावी सफलताओं और सरकारी पदों के साथ विवादों से भी जुड़ा रहा है। गुजरात में गृह राज्य मंत्री रहते हुए उनका नाम सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में सामने आया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में उन्हें आरोपी बनाया और 2010 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। बाद में उन्हें जमानत मिली। 2014 में मुंबई की विशेष CBI अदालत ने उन्हें आरोपमुक्त कर दिया। इस मामले का उल्लेख करते समय आरोपों और अदालत के अंतिम आदेश के बीच अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है।

इसके अलावा, अनुच्छेद 370 और CAA जैसे फैसलों पर भी राजनीतिक दलों, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समूहों के बीच बहस हुई। भाजपा ने इन फैसलों का समर्थन किया, जबकि विपक्षी दलों ने उनके संवैधानिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर सवाल उठाए। इसलिए अमित शाह की राजनीतिक भूमिका का आकलन करते समय उनके संगठनात्मक काम और चुनावी उपलब्धियों के साथ उनके कार्यकाल से जुड़े विवादों तथा आलोचनाओं को भी समझना जरूरी है।

सवाल 8: अमित शाह की निजी जिंदगी के बारे में क्या जानकारी है?

अमित शाह का विवाह सोनल शाह से 22 दिसंबर 1987 को हुआ था। संसदीय परिचय के अनुसार, उनका एक बेटा है। राजनीति के अलावा उनकी रुचि क्रिकेट, इतिहास और साहित्य में बताई जाती है। वे गुजरात के सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट से भी जुड़े हैं और फरवरी 2016 में इसके ट्रस्टी बने थे।

Amit Shah Birthday Explainer: गुजरात से दिल्ली तक कैसे पहुंचा अमित शाह का सियासी सफर?

अमित शाह की राजनीतिक यात्रा RSS और छात्र संगठन ABVP से शुरू होकर गुजरात भाजपा, राज्य सरकार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंची। 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदर्शन के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए। 2019 में गृह मंत्री बनने के बाद अनुच्छेद 370 में बदलाव, CAA और सहकारिता मंत्रालय जैसे मुद्दे उनके कार्यकाल के अहम हिस्से बने।

22 अक्टूबर को उनके जन्मदिन पर उनके सफर को समझने के लिए केवल पदों और चुनावी जीत पर नजर डालना पर्याप्त नहीं है। उनकी संगठनात्मक भूमिका, सरकारी फैसले, विवाद और उन पर हुई राजनीतिक बहस ये सभी पहलू अमित शाह की सार्वजनिक छवि और भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका को समझने में मदद करते हैं।

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