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देश के असली Gen Z ने विरोध करने वालों को दिया जवाब, सनातन संस्कृति और भजन क्लबिंग पर रखी बेबाक राय

सनातन संस्कृति पर युवती ने रखी अपनी राय
सनातन संस्कृति पर युवती ने रखी अपनी राय

Gen Z India: आज के युवा सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस तरह कर रहे हैं, सनातन संस्कृति से उनका जुड़ाव कितना बढ़ रहा है और विरोध प्रदर्शनों में उनकी भूमिका कैसी होनी चाहिए? इन मुद्दों पर इन दिनों अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। इसी बीच खबर इंडिया के एक वीडियो में शारदा यूनिवर्सिटी में आयोजित सनातन युवा महोत्सव में शामिल एक युवती ने जेन-जी की सोच, भजन क्लबिंग, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों और सीजेपी के प्रदर्शनों को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और उमर खालिद जैसे व्यक्तित्वों का उदाहरण देते हुए कहा कि युवाओं को अपनी प्रेरणा सोच-समझकर चुननी चाहिए। साथ ही, उन्होंने सोशल मीडिया पर समय बिताने, भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने और देश के प्रति युवाओं की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।

Gen Z India: युवाओं की सोच और उनके आदर्शों पर उठाए सवाल

युवती ने कहा कि युवाओं की सोच पर उनके आदर्शों का गहरा प्रभाव पड़ता है। उनके मुताबिक, जो युवा स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेते हैं, वे समाज और देश को जोड़ने का प्रयास करते हैं। वहीं, उन्होंने नेहा मौर्या और नेहा बोरा जैसी वामपंथी विचारधारा से जुड़ी महिलाओं की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि ऐसी विचारधारा देश को बांटने का काम करती है।उन्होंने उमर खालिद का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि युवा ऐसे लोगों को अपना आदर्श बनाते हैं, तो उनकी सोच पर भी उसका असर पड़ सकता है। युवती ने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदू होने पर गर्व करने की भावना को प्रोत्साहित किया था। उनके अनुसार, भारत की उपलब्धियों और संस्कृति से प्रेरणा लेने के बजाय बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरित होने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए जाने चाहिए।

जेन-जी के लिए भजन क्लबिंग को बताया सकारात्मक पहल

युवती ने कहा कि आज के युवाओं के सामने अपनी पहचान बनाने के कई रास्ते हैं। उन्होंने ऐसे युवाओं के बीच अंतर बताया, जो विरोध प्रदर्शनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं और वे युवा जो अपनी प्रतिभा के माध्यम से देश का नाम आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।उन्होंने भजन क्लबिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भारतीय परंपरा को आधुनिक अंदाज में युवाओं तक पहुंचाने का एक तरीका है। उनके अनुसार, भजनों को नए रूप में प्रस्तुत करने से युवा उनसे जुड़ सकते हैं और भारतीय संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि आज कुछ युवा अंतरिक्ष से जुड़े मॉडल और उड़ने वाले विमान जैसी तकनीकी चीजें बनाने में जुटे हैं। ऐसे प्रयासों से भी भारतीय युवाओं की क्षमता सामने आती है। उनके मुताबिक, हर युवा को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कुछ सार्थक करने पर ध्यान देना चाहिए।

Gen Z India: मोबाइल का इस्तेमाल नहीं, बेवजह स्क्रॉलिंग है समस्या

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से युवाओं के रील देखने और मोबाइल पर अधिक समय बिताने को लेकर जताई गई चिंता पर युवती ने कहा कि फोन का इस्तेमाल करना अपने आप में गलत नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से भारत की संस्कृति, उपलब्धियों और सकारात्मक पहलुओं को दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। युवाओं को घंटों तक बिना किसी उद्देश्य के रील देखने के बजाय ऐसा कंटेंट बनाना और साझा करना चाहिए, जिससे देश की छवि बेहतर हो।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर कुछ विरोध प्रदर्शनों को लेकर ऐसा नैरेटिव बनाया जाता है, जिससे युवा प्रभावित होकर उन्हीं गतिविधियों में शामिल होने लगते हैं। उनके अनुसार, कुछ युवा पहले किसी आंदोलन में शामिल होने के बारे में नहीं सोचते, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद उससे प्रेरित होकर प्रदर्शन में पहुंच जाते हैं और प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगते हैं।युवती ने कहा कि युवाओं के मोबाइल इस्तेमाल करने पर आपत्ति करने के बजाय यह देखना जरूरी है कि वे फोन पर क्या कर रहे हैं। यदि वे इसका इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों के लिए कर रहे हैं, तो यह अच्छी बात है। समस्या तब है, जब वे अपना समय बेवजह स्क्रॉलिंग में बिताते हैं या नकारात्मक गतिविधियों से प्रभावित होते हैं।

बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा लेने पर जताई असहमति

जब युवती से पूछा गया कि कुछ युवा भारत में प्रदर्शन करने से पहले बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा लेने की बात क्यों कहते हैं, तो उन्होंने इस सोच की आलोचना की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने देश की उपलब्धियों और सकारात्मक उदाहरणों से प्रेरणा लेनी चाहिए।उन्होंने नेहा बोरा का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े कुछ लोग उमर खालिद जैसे व्यक्तियों को आदर्श मानते हैं और देश को बांटने वाली सोच को बढ़ावा देते हैं। उनके अनुसार, भारत की संस्कृति और उपलब्धियों को नजरअंदाज करके दूसरे देशों के आंदोलनों से प्रेरणा लेना उचित नहीं है।

Gen Z India: ‘अंदर के रावण’ को खत्म करने की जरूरत

दिल्ली में दशहरे के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रावण के प्रतीकात्मक दहन के साथ अन्य बुराइयों को खत्म करने की जरूरत का जिक्र किए जाने पर भी युवती से सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या देश में बार-बार विरोध प्रदर्शन करने वाले कुछ समूहों की विचारधारा भी इसी संदर्भ में देखी जा सकती है।इस पर उन्होंने कहा कि उनके अनुसार, सबसे पहले ऐसी सोच को खत्म करने की जरूरत है, जो समाज और देश को बांटने का प्रयास करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग ऐसे विचार फैलाते हैं, जिनसे युवा प्रभावित हो सकते हैं।युवती ने युवाओं को सलाह दी कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना आदर्श बनाने से पहले उसकी विचारधारा और काम को समझें। उन्होंने कहा कि युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनना चाहिए और अपने भीतर मौजूद नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण रखना चाहिए। उनके मुताबिक, दूसरों की गलतियों पर ध्यान देने के साथ-साथ अपने अंदर की बुराइयों को पहचानना भी जरूरी है।

सीजेपी के भविष्य को लेकर क्या कहा?

सीजेपी के भविष्य और उसके प्रदर्शनों में युवाओं की भागीदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर युवती ने संगठन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनके विचार में ऐसे प्रदर्शनों का कोई खास भविष्य नहीं है, क्योंकि उनमें शामिल लोगों के पास कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं है।उन्होंने आईआईटी के विद्यार्थियों का उदाहरण देते हुए कहा कि पढ़ाई और अपने करियर को लेकर गंभीर रहने वाले युवा अपना समय शिक्षा और दूसरे रचनात्मक कार्यों में लगाते हैं। उनके अनुसार, जो युवा पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों पर ध्यान दे रहे हैं, वे ऐसे प्रदर्शनों में शामिल होने के बजाय अपने भविष्य पर काम करना पसंद करेंगे।उन्होंने कुछ प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया कि वे तिरंगे का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों को सही ठहराने के लिए करते हैं। युवती ने दावा किया कि कुछ लोग पहले देशविरोधी विचारों को बढ़ावा देते हैं और फिर वंदे मातरम जैसे नारों का इस्तेमाल करके अपनी छवि को सामान्य दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारी तिरंगे की आड़ लेकर अपनी पहचान बनाने का प्रयास करते हैं।ये सभी आरोप युवती ने अपने विचार रखते हुए लगाए। वीडियो में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई है।

Gen Z India: सनातन युवा महोत्सव में युवाओं की भागीदारी पर खुशी जताई

शारदा यूनिवर्सिटी में आयोजित सनातन युवा महोत्सव के बारे में युवती ने कहा कि वह कार्यक्रम में शामिल होकर काफी खुश हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें देश में सनातन संस्कृति के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि देखकर प्रसन्नता होती है।उन्होंने कहा कि पहले कई युवाओं को सनातन संस्कृति के अर्थ और उसकी परंपराओं की पर्याप्त जानकारी नहीं थी, लेकिन अब युवा इन विषयों से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार, भजन क्लबिंग जैसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का एक माध्यम बन सकते हैं।युवती ने कहा कि समय के साथ कार्यक्रमों के स्वरूप में बदलाव आना स्वाभाविक है। जिस तरह आज की पीढ़ी संगीत और आधुनिक आयोजनों में रुचि रखती है, उसी तरह भजन क्लबिंग के जरिए धार्मिक भजनों को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे अधिक से अधिक युवा सनातन संस्कृति के विचारों और संस्कारों से जुड़ सकते हैं।

विरोध प्रदर्शनों के बजाय भजन क्लबिंग से जुड़ना पसंद

जब उनसे पूछा गया कि वह उन युवाओं के साथ खुद को जोड़ती हैं, जो दिल्ली में प्रदर्शन करते हैं, पुलिसकर्मियों से भिड़ते हैं और सेना के जवानों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, या उन युवाओं के साथ जो भजन क्लबिंग में हिस्सा लेते हैं, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से भजन क्लबिंग को अपनी पसंद बताया।उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार, रहन-सहन और संस्कारों से उसकी सोच का पता चलता है। उनके अनुसार, सनातन युवा महोत्सव में शामिल युवा भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वह सीजेपी के प्रदर्शनों से जुड़ी गतिविधियों को उचित नहीं मानतीं।उन्होंने अपने विचार को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह ऐसे आयोजनों से जुड़ना चाहेंगी, जहां युवा भारतीय परंपराओं को नए अंदाज में प्रस्तुत करें और दूसरे लोगों को भी उनसे जुड़ने के लिए प्रेरित करें।

Gen Z India: योगी सरकार के कार्यकाल में धार्मिक पर्यटन बढ़ने का दावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से विरासत और विकास पर दिए जाने वाले जोर के बारे में युवती ने कहा कि उनके अनुसार, वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में सनातन संस्कृति और धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है।उन्होंने अयोध्या, बनारस, मथुरा और वृंदावन का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग त्योहारों के समय इन स्थानों पर पहुंच रहे हैं। उनके मुताबिक, लोग अन्य पर्यटन स्थलों और मनोरंजन के विकल्पों को चुन सकते हैं, लेकिन धार्मिक अवसरों पर अयोध्या में दीपोत्सव मनाने, बनारस में होली मनाने और मथुरा-वृंदावन जाने की रुचि भी देखने को मिलती है।युवती ने इसे धार्मिक विरासत के प्रति बढ़ते जुड़ाव का संकेत बताया और कहा कि इस तरह के बदलाव से भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

धर्म और संस्कृति की रक्षा पर योगी के बयान का समर्थन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान को लेकर भी सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने धर्म नहीं छोड़ने और जरूरत पड़ने पर बम-गोले दागने की बात कही थी। इस बयान का कुछ लोगों ने विरोध किया था।इस पर युवती ने कहा कि किसी भी बयान को उसके संदर्भ में समझना चाहिए। उनके अनुसार, कुछ लोग ऐसे बयानों का नकारात्मक अर्थ निकालते हैं, जबकि दूसरे लोग उन्हें सकारात्मक नजरिए से देखते हैं।उन्होंने कहा कि उनके विचार में इस बयान का आशय यह है कि यदि कोई भारतीय संस्कृति पर हमला करता है या संघर्ष करने का प्रयास करता है, तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गलत गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करते और तुरंत कार्रवाई करने के लिए जाने जाते हैं।युवती ने अंत में कहा कि सनातन परंपरा भी अन्याय के खिलाफ खड़े होने और अपनी संस्कृति की रक्षा करने की सीख देती है।