Urban Dimagi Naxal: बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने छात्र संघ की बहाली की मांग कर रहे जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों का समर्थन किया और खुद को गर्व से ‘दिमागी नक्सली’ बताया। उनके इस बयान की केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे और अभिनेता पुनीत इस्सर ने आलोचना की है।
Urban Dimagi Naxal: किरण रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर नसीरुद्दीन शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले लगता था कि नसीरुद्दीन शाह एक साधारण अभिनेता हैं। वह उनका सम्मान करते थे और उन्हें पसंद भी करते थे।रिजिजू ने कहा कि उन्हें पहले यह जानकारी नहीं थी कि नसीरुद्दीन शाह एक खतरनाक शहरी दिमागी नक्सली हैं। उन्होंने दावा किया कि अभिनेता के असली चरित्र के बारे में उन्हें काफी देर से पता चला। उनके मुताबिक, ऐसी सोच भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद नुकसानदायक है।
पुनीत इस्सर ने भी की बयान की आलोचना
अभिनेता पुनीत इस्सर ने नसीरुद्दीन शाह की आलोचना करते हुए कहा कि वह उनके वरिष्ठ हैं और उनके शिक्षक भी रह चुके हैं। वह उनका सम्मान करते हैं और उन्हें एक बेहतरीन कलाकार मानते हैं।हालांकि, पुनीत इस्सर ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी राय रखता है, तो उसे अलग-अलग मुद्दों पर भी अपनी बात रखनी चाहिए। उनके अनुसार, नसीरुद्दीन शाह देश और दुनिया से जुड़े कई मामलों पर चुप रहते हैं, लेकिन चुनिंदा मुद्दों पर ही प्रतिक्रिया देते हैं।पुनीत ने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह एकतरफा, वामपंथी और नक्सल समर्थक विचारों को चुनते हैं और हर मुद्दे पर उसी विचारधारा के नजरिए से अपनी बात रखते हैं।
Urban Dimagi Naxal: सरकार पसंद नहीं तो चुनाव लड़ें: पुनीत इस्सर
पुनीत इस्सर ने अपनी बात रखते हुए ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़े लोगों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश में दोषी अपराधियों और जेल में बंद आतंकवादियों की बात आती है, तो ऐसे लोग उनकी रिहाई की मांग करते हैं और उनके समर्थन में बोलते हैं।उन्होंने नसीरुद्दीन शाह से सवाल किया कि अगर वह ऐसे लोगों का समर्थन करते हैं, तो फिर भारतीय होने का क्या मतलब है।पुनीत ने कहा कि हर नागरिक को अपनी राय रखने और सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। लेकिन अगर किसी को मौजूदा सरकार पसंद नहीं है, तो उसे राजनीति में आकर चुनाव लड़ना चाहिए, जीत हासिल करनी चाहिए और सरकार को सत्ता से हटाना चाहिए।उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार अपने आप सत्ता में नहीं आई है, बल्कि देश की जनता ने उसे चुना है।
नितेश राणे ने भी की तीखी टिप्पणी
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी नसीरुद्दीन शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह मानसिक रूप से नक्सली हैं और उन्हें पाकिस्तान की ओर से तय की गई बातें बोलने के लिए पैसे मिलते हैं।राणे ने यह भी कहा कि अभिनेता के पास अब फिल्मों में ज्यादा काम नहीं बचा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नसीरुद्दीन शाह को गंभीरता से लेने से पहले यह पूछना चाहिए कि वह दिन में कितने घंटे होश में रहते हैं।
Urban Dimagi Naxal: नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था?
नसीरुद्दीन शाह ने मंगलवार को फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उनका आरोप था कि सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने की कोशिश कर रही है।वीडियो में अभिनेता ने ‘दिमागी नक्सल’ लिखा हुआ एक बैज भी पहना था, जिसे उन्होंने कैमरे के सामने दिखाया।उन्होंने कहा कि वह गर्व के साथ खुद को ‘दिमागी नक्सली’ बताते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि सरकार के आलोचकों के लिए और कौन-कौन से नाम इस्तेमाल किए जाते हैं। उन्होंने ‘राष्ट्रविरोधी’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे शब्दों का भी जिक्र किया।नसीरुद्दीन शाह ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि देश के युवाओं का मनोबल तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए सरकार और क्या करना चाहती है। उन्होंने पूछा कि सरकार आखिर कहां तक जाएगी।
पहले भी कई मुद्दों पर सरकार की आलोचना कर चुके हैं शाह
नसीरुद्दीन शाह इससे पहले भी अलग-अलग मुद्दों पर सरकार की आलोचना कर चुके हैं। जुलाई में उन्होंने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाए थे।इसके अलावा, पिछले हफ्ते उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान के छात्रों का भी समर्थन किया था। ये छात्र परिसर में हुई हिंसक घटनाओं के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।








