Super El Niño: दुनियाभर में मौसम के बदलते पैटर्न के बीच ‘सुपर अल नीनो’ को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके प्रभाव से कई देशों में भीषण गर्मी पड़ने और गर्मी से होने वाली मौतों में इजाफा होने की आशंका जताई गई है। क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के एक हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर के मुताबिक, भारत समेत कई देशों में इसका गंभीर असर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट में अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच गर्मी के खतरे को लेकर चेतावनी दी गई है। इस अनुमान के अनुसार, भारत भी उन देशों में शामिल है, जहां अत्यधिक गर्मी के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने का जोखिम हो सकता है। हालांकि, ये आंकड़े वैज्ञानिक अनुमानों पर आधारित हैं, किसी निश्चित संख्या में मौतें होने की पुष्टि नहीं करते।
Super El Niño: अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक बढ़ सकता है गर्मी का खतरा
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के ‘अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर’ के अनुसार, अल नीनो की स्थिति के कारण दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच इसका प्रभाव कई क्षेत्रों में महसूस होने की आशंका जताई गई है। अल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री सतह के तापमान में होने वाले बदलाव से जुड़ी जलवायु संबंधी घटना है। इसका असर वैश्विक मौसम के पैटर्न पर पड़ सकता है। इसके कारण कुछ क्षेत्रों में तापमान बढ़ सकता है, जबकि दूसरे इलाकों में बारिश और मौसम के सामान्य पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है।
Super El Niño: प्रशांत महासागर के तापमान में 3.4 डिग्री की बढ़ोतरी का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 18 से 24 अक्टूबर के बीच पूर्वी-मध्य प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से लगभग 3.4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। समुद्र के तापमान में इस तरह का बदलाव वैश्विक मौसम को प्रभावित कर सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के पूर्वानुमानों के आधार पर आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति में बदलाव पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, समुद्र के तापमान में किसी खास अवधि के दौरान होने वाली बढ़ोतरी और उसके वैश्विक प्रभाव का आकलन करने के लिए आधिकारिक मौसम संबंधी आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।
भारत समेत इन देशों में गर्मी से मौतों का खतरा
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के ट्रैकर से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, अल नीनो के प्रभाव के कारण कुछ देशों में गर्मी से होने वाली अतिरिक्त मौतों का जोखिम अधिक हो सकता है। रिपोर्ट में जिन देशों का उल्लेख किया गया है, उनमें भारत भी शामिल है।
अनुमानित आंकड़े इस प्रकार बताए गए हैं:
– नाइजीरिया: 56,000 से अधिक मौतों का अनुमान
– भारत: लगभग 55,200 मौतों का अनुमान
– इंडोनेशिया: लगभग 29,300 मौतों का अनुमान
– ब्राजील: लगभग 19,500 मौतों का अनुमान
– सूडान: लगभग 14,700 मौतों का अनुमान
ये आंकड़े अनुमानित जोखिम को दर्शाते हैं। इन्हें निश्चित रूप से होने वाली मौतों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक प्रभाव मौसम की परिस्थितियों, स्थानीय तापमान, स्वास्थ्य सुविधाओं और गर्मी से बचाव के उपायों पर निर्भर करेगा।
9 महीनों में 8.57 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान
रिपोर्ट में 9 महीनों के दौरान दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का अनुमान भी दिया गया है। इसके मुताबिक, जून 2026 से मार्च 2027 के बीच गर्मी के प्रभाव से लगभग 8,57,400 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान लगाया गया है। इस आकलन के लिए वैज्ञानिकों ने 1996 से 2005 के बीच अल नीनो की परिस्थितियों और उनके प्रभावों का अध्ययन किया। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के लगभग 3,700 क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के आधार पर जोखिम का आकलन किया गया। हालांकि, इन आंकड़ों और अनुमान की समयावधि को मूल अध्ययन से सत्यापित करना जरूरी है। अलग-अलग मॉडल और अध्ययन गर्मी से होने वाली मौतों के अलग-अलग अनुमान दे सकते हैं।
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने क्यों जारी किया हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर?
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब का हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जहां अत्यधिक गर्मी से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकता है। संस्था के सह-संस्थापक और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के अर्थशास्त्री माइकल ग्रीनस्टोन के अनुसार, इस तरह के पूर्वानुमानों का उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां लोगों को गर्मी से बचाने के लिए पहले से तैयारी की जा सकती है। ऐसे आकलन सरकारों और स्थानीय प्रशासन को हीट एक्शन प्लान तैयार करने, अस्पतालों की व्यवस्था मजबूत करने और लोगों तक समय पर चेतावनी पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।
भारत में गर्मी से बचाव के लिए तैयारी क्यों जरूरी?
भारत में अत्यधिक गर्मी का असर स्वास्थ्य, कृषि, बिजली की मांग और पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है। यदि तापमान लंबे समय तक अधिक बना रहता है, तो बुजुर्गों, बच्चों, खुले में काम करने वाले श्रमिकों और पहले से बीमार लोगों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन के लिए हीटवेव अलर्ट जारी करना, सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था करना, अस्पतालों को तैयार रखना और लोगों को गर्मी से बचाव के उपायों की जानकारी देना महत्वपूर्ण है। सुपर अल नीनो और उससे होने वाली मौतों को लेकर दिए गए आंकड़े पूर्वानुमान हैं, निश्चित परिणाम नहीं। इन्हें प्रकाशित करने से पहले क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के मूल ट्रैकर और विश्व मौसम विज्ञान संगठन के नवीनतम बुलेटिन से सत्यापित करना जरूरी है।
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