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120 सीटें, बहुमत के लिए 61 जरूरी… इजराइल में अरब पार्टियां कैसे बनीं किंगमेकर?

Israel Election Explainer: इजराइल के चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से आठ सीटें पीछे है। वहीं, विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले खेमे को 48 सीटें मिलने का अनुमान है। दूसरी ओर, अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें जाने की संभावना है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन निर्णायक हो सकता है। हालांकि, अंतिम नतीजों की घोषणा 4 नवंबर को होनी है। सवाल है कि इजराइल में अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, अरब पार्टियां किसका साथ देंगी और क्या इससे मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा? समझिए सरकार बनाने का पूरा गणित।

इजराइल में किसी को बहुमत नहीं मिला, अब सरकार कैसे बनेगी?

जवाब: इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। यहां मतदाता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनते, बल्कि संसद के सदस्यों का चुनाव करते हैं। इसके बाद राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है।

मतगणना के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें और विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के खेमे को 48 सीटें मिलने की संभावना है। दोनों ही बहुमत के आंकड़े से दूर हैं। दूसरी ओर, अरब पार्टियों को मिलाकर 19 सीटें मिलने का अनुमान है। यदि ये आंकड़े अंतिम नतीजों में कायम रहते हैं, तो अरब पार्टियां सरकार गठन की बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

Israel Election Explainer: इजराइल में सरकार बनाने की प्रक्रिया के चार अहम चरण हैं।

1. राष्ट्रपति तय करेंगे किसे मिलेगा मौका

इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग चुनाव के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वह उस सांसद को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना हो। जरूरी नहीं कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को ही यह जिम्मेदारी मिले। राष्ट्रपति का फैसला इस बात पर भी निर्भर करता है कि कौन-सा नेता दूसरे दलों का समर्थन जुटा सकता है।

2. सरकार बनाने के लिए मिलेंगे 28 दिन

राष्ट्रपति की ओर से नामित नेता को सरकार बनाने के लिए 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं। इस तरह अधिकतम 42 दिन में बहुमत जुटाने की कोशिश की जा सकती है। इस दौरान संबंधित नेता को सहयोगी दलों के साथ बातचीत कर सरकार बनाने के लिए समर्थन हासिल करना होता है।

3. पहली कोशिश नाकाम हुई तो दूसरे नेता को मौका

अगर पहला नेता सरकार बनाने में नाकाम रहता है, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को यह जिम्मेदारी दे सकते हैं। इसके बाद भी सरकार बनाने में सफलता नहीं मिलती, तो इजराइल के कानून के तहत आगे की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में गठबंधन की बातचीत और विभिन्न दलों के बीच सहमति अहम हो जाती है।

4. सरकार नहीं बनी तो दोबारा चुनाव की नौबत

अगर निर्धारित प्रक्रिया के तहत कोई भी नेता सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो नेसेट भंग होने और नए चुनाव का रास्ता खुल सकता है। नई सरकार बनने तक निवर्तमान सरकार कामकाज संभालती रहती है। इजराइल में पहले भी राजनीतिक गतिरोध के कारण कम समय के भीतर कई बार चुनाव कराने की नौबत आ चुकी है।

Israel Election Explainer: सवाल-2: किंगमेकर बनीं अरब पार्टियां कौन हैं?

जवाब: इजराइल में अरब नागरिकों की आबादी कुल जनसंख्या का करीब 20 प्रतिशत है। इनका प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में जॉइंट लिस्ट और रा’आम (यूनाइटेड अरब लिस्ट) शामिल हैं। शुरुआती चुनावी अनुमानों में इन दोनों अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों को मिलाकर 19 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यह आंकड़ा कायम रहता है, तो सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाने वाले किसी भी खेमे के लिए उनका समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, अरब पार्टियों का एक साथ किसी गठबंधन का समर्थन करना अभी तय नहीं है।

अरब पार्टियों का चुनावी इतिहास

अरब पार्टियों की चुनावी ताकत समय के साथ बदलती रही है। कभी उन्होंने एकजुट होकर चुनाव लड़ा, तो कभी अलग-अलग गठबंधनों में मैदान में उतरीं।2015: चार अरब पार्टियों ने जॉइंट लिस्ट के रूप में चुनाव लड़ा और 13 सीटें जीतीं। 2019: अरब पार्टियां अलग-अलग गठबंधनों में चुनाव मैदान में उतरीं। बाद में कुछ दल फिर एकजुट हुए। 2020: एकजुट होकर चुनाव लड़ने वाले अरब दलों ने 15 सीटें हासिल कीं। 2021: रा’आम ने अलग चुनाव लड़ा और चार सीटें जीतीं। दूसरी अरब पार्टियां भी गठबंधन के रूप में मैदान में थीं। 2022: रा’आम और हदाश-ताल ने पांच-पांच सीटें जीतीं, जबकि बलाद जरूरी चुनावी सीमा पार नहीं कर पाई। 2026 के चुनाव में अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलने का अनुमान उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व में संभावित बढ़ोतरी को दिखाता है। लेकिन उनका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वे सरकार गठन की बातचीत में किस तरह की भूमिका निभाती हैं।

Israel Election Explainer: सवाल-3: अरब पार्टियां किसे समर्थन देंगी? क्या जा सकती है नेतन्याहू की सत्ता?

जवाब: फिलहाल सरकार गठन को लेकर तीन संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। हालांकि, इनमें से किसी भी विकल्प पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। चुनावी नतीजों, दलों की शर्तों और गठबंधन वार्ता के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

1. आइजेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं

विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के खेमे को 48 सीटें मिलने का अनुमान है। बहुमत के लिए उसे कम से कम 13 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में अरब पार्टियों का समर्थन उसके लिए अहम हो सकता है। यदि जॉइंट लिस्ट और रा’आम दोनों का समर्थन मिल जाता है, तो विपक्षी खेमे के लिए बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना संभव हो सकता है। लेकिन इसके लिए संबंधित दलों के बीच राजनीतिक सहमति बनना जरूरी होगा। इस विकल्प में सबसे बड़ी चुनौती विचारधारा और राजनीतिक प्राथमिकताओं की है। इजराइल के कई यहूदी-नेतृत्व वाले विपक्षी दल अरब पार्टियों के साथ औपचारिक गठबंधन करने को लेकर असहज रहे हैं। इसलिए केवल सीटों का गणित सरकार बनने की गारंटी नहीं देता।

2. अरब पार्टियां सरकार में शामिल हुए बिना भी समर्थन दे सकती हैं

दूसरी संभावना यह है कि अरब पार्टियां सरकार में मंत्री पद लिए बिना भी विपक्षी गठबंधन का समर्थन करें। इसे बाहरी समर्थन कहा जाता है। इस व्यवस्था में कोई पार्टी सरकार का हिस्सा बने बिना विश्वास मत या अन्य महत्वपूर्ण मौकों पर उसका साथ दे सकती है।

ऐसी स्थिति में अरब पार्टियां अपने समुदाय से जुड़े मुद्दों को बातचीत का हिस्सा बना सकती हैं। इनमें स्थानीय विकास, शिक्षा, आवास, सरकारी बजट और अपराध पर नियंत्रण जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि सभी अरब पार्टियां एक जैसी शर्तों पर समर्थन देने को तैयार हों। उनकी मांगें और विपक्षी दलों की स्वीकार्यता सरकार गठन की दिशा तय करने में अहम होंगी।

3. नेतन्याहू भी दूसरे दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं

नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत से आठ सीटें कम मिलने का अनुमान है। ऐसे में उनके सामने भी दूसरे दलों का समर्थन हासिल करने की चुनौती है। यदि विपक्षी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच सहमति नहीं बनती, तो नेतन्याहू अन्य राजनीतिक विकल्प तलाश सकते हैं। रा’आम के नेता मंसूर अब्बास की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, अरब पार्टियों के समर्थन को लेकर नेतन्याहू के पुराने रुख और दूसरे सहयोगी दलों की आपत्तियों को देखते हुए ऐसा समझौता आसान नहीं होगा। फिलहाल इसे एक संभावना के तौर पर ही देखा जा सकता है।

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क्या 2021 की तरह फिर बन सकता है सत्ता बदलने वाला गठबंधन?

2021 में इजराइल में लंबे राजनीतिक गतिरोध के बाद नफ्ताली बेनेट के नेतृत्व में सरकार बनी थी। उस समय अलग-अलग विचारधारा वाले दल नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने के लिए एक साथ आए थे। रा’आम ने भी उस गठबंधन का समर्थन किया था। इस घटनाक्रम से पता चलता है कि इजराइल में सरकार बनाने के लिए केवल सबसे बड़ी पार्टी होना पर्याप्त नहीं है। सहयोगी दलों का समर्थन और उनके बीच समझौता भी महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, 2021 और 2026 के राजनीतिक समीकरण अलग हैं। इसलिए पुराने घटनाक्रम के आधार पर इस बार की सरकार को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

सवाल-4: इजराइल में करीब 21 लाख अरब नागरिक कैसे रहते हैं?

जवाब: इजराइल की अरब आबादी का इतिहास 1948 में देश की स्थापना और उसके साथ हुए विस्थापन से जुड़ा है। उस दौर में बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी अपने घरों से विस्थापित हुए, जबकि कुछ अरब परिवार इजराइल की सीमाओं के भीतर रह गए। समय के साथ उनकी अगली पीढ़ियां इजराइली अरब नागरिकों के रूप में विकसित हुईं।

आज इजराइल के अरब नागरिकों में मुस्लिमों के साथ ईसाई और द्रूज समुदाय के लोग भी शामिल हैं। इसलिए अरब आबादी और मुस्लिम आबादी को एक ही मानना सही नहीं होगा। इजराइल के अरब नागरिकों का बड़ा हिस्सा गलील, ट्रायंगल और नेगेव जैसे क्षेत्रों में रहता है। हाइफा, अक्का, लॉड और रामले जैसे शहरों में भी अरब समुदाय की आबादी है। अरब नागरिकों को इजराइल में मतदान का अधिकार है और वे संसद के चुनाव में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, औपचारिक नागरिक अधिकारों के बावजूद समुदाय के सामने विकास, आवास, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट और अरब समुदाय के अधिकारों पर काम करने वाले संगठनों ने अपनी रिपोर्टों में स्थानीय सेवाओं, सरकारी बजट और अपराध से जुड़ी समस्याओं को उठाया है। इन मुद्दों के कारण अरब पार्टियां राष्ट्रीय राजनीति में प्रतिनिधित्व के साथ-साथ अपने समुदाय के रोजमर्रा के सवालों को भी प्रमुखता देती हैं।

Israel Election Explainer: सवाल-5: क्या सरकार गठन में इजराइल में मुस्लिमों का दबदबा बढ़ जाएगा?

जवाब: अरब पार्टियों का मजबूत प्रदर्शन उनके राजनीतिक प्रभाव में बढ़ोतरी का संकेत हो सकता है, लेकिन इसे सीधे इजराइल में मुस्लिमों के दबदबे के रूप में देखना सही नहीं होगा। अरब समुदाय में मुस्लिमों के अलावा ईसाई और द्रूज भी शामिल हैं। इसके अलावा, 19 सीटें मिलने का अनुमान और सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका हासिल करना दो अलग बातें हैं।

अगर अरब पार्टियां सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, तो उन्हें अपने समुदाय से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बातचीत में आगे रखने का अवसर मिल सकता है। इनमें स्थानीय विकास, रोजगार, शिक्षा, आवास और अपराध पर नियंत्रण जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, इससे अपने आप सभी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। अरब पार्टियों को भी अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं और इजराइल की व्यापक राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन बनाना होगा। उनका समर्थन किसी गठबंधन को सरकार बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे देश की पूरी सत्ता उनके हाथ में आ जाएगी, ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

सरकार की चाबी किसके हाथ में होगी?

इजराइल के चुनावी गणित में इस बार अरब पार्टियां अहम भूमिका में दिखाई दे रही हैं। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें, आइजेनकोट के खेमे को 48 सीटें और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलने की संभावना है। बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए दोनों खेमों को सहयोगी दलों का समर्थन जुटाना होगा।

लेकिन सरकार गठन का फैसला केवल सीटों की संख्या से नहीं होगा। अरब पार्टियों की शर्तें, दूसरे दलों की स्वीकार्यता और राष्ट्रपति की ओर से सरकार बनाने का मौका मिलने के बाद होने वाली बातचीत भी निर्णायक होंगी। अंतिम नतीजे घोषित होने और गठबंधन की तस्वीर साफ होने तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि इजराइल का अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा।

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