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कांग्रेस में ‘SIR’ पर उभरे मतभेद, मंत्री सतीश जारकीहोली की बात मानें या राहुल गांधी की?

Opinion: कांग्रेस में 'SIR' पर उभरे मतभेद, मंत्री सतीश जारकीहोली की बात मानें या राहुल गांधी की?
Opinion: कांग्रेस में 'SIR' पर उभरे मतभेद, मंत्री सतीश जारकीहोली की बात मानें या राहुल गांधी की?

Opinion: कांग्रेस नेता राहुल गांधी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में धांधलियों का आरोप लगाते हुए पिछले कई दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान चलाए हुए हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। अब 1 नवंबर को वे दिल्ली के रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में जुटे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने व्यापारियों की अपील तक अनसुनी कर दी, लेकिन इसी बीच कर्नाटक के मंत्री कैबिनेट सतीश जारकीहोली ने उन्हें और उनके साथ अभियान में उतरे तमाम नेताओं को असहज कर दिया है।मंत्री ने एक तरह से चुनाव आयोग की प्रक्रिया को क्लीन चिट देकर राहुल गांधी की मुहिम को जोर का झटका दे दिया है।मंत्री जारकीहोली के अनुसार कर्नाटक में एसआईआर का काम बिल्कुल सही तरीके से पूरा किया गया है। उन्होंने बताया कि SIR के बाद कर्नाटक में मतदाता सूची से करीब 99.32 लाख (लगभग 1 करोड़) नाम हटाए गए हैं, जिसमें मृत, एक से अधिक जगह नाम दर्ज (डुप्लीकेट) या दूसरे स्थान पर जा चुके (शिफ्टेड) लोग शामिल थे। उनका मानना है कि कर्नाटक में कांग्रेस नेताओं की सजगता और कार्यकर्ताओं को दी गई ट्रेनिंग का ही असर था कि राज्य में SIR प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई।ऐसा दूसरे राज्यों में भी होना चाहिए था।

राहुल गांधी से कैसे चूक हो गई?

हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब मंत्री को अनुशासनहीन बताने में जुट गए हैं।पार्टी के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा कि जारकीहोली का बयान पार्टी नेतृत्व के स्टैंड से एकदम विपरीत है। मंत्री के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है, लेकिन कितनी बड़ी विडंबना है कि राहुल गांधी राष्ट्रीय राजनीति में इंडिया गठबंधन को दिशा देने के लिए प्रयासरत हैं, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मुहिम चलाए हुए हैं, लेकिन खुद उन्हीं की पार्टी के नेता उनसे अलग बात कर रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी ने अपनी मुहिम शुरू करने से पहले अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श नहीं किया होगा, जो कि आज वे अलग-अलग भाषा बोल रहे हैं? राजनीति में तो कोई भी नेता किसी भी मुद्दे पर लड़ाई शुरू करने से पहले पूरी तैयारी कर लेता है।एक परिपक्व नेता अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और यहाँ तक कि कार्यकर्ताओं की बैठक कर कोई भी बड़ा कदम आगे बढ़ाता है। क्या राहुल गांधी इसे जरूरी नहीं समझते होंगे? क्या उन्हें ऐसा तो नहीं लगता होगा कि जो भी बात वे कह देंगे वह सार्वभौमिक सत्य हो जाएगी ? आखिर राहुल गांधी से इस दिशा में कैसे चूक हो गई?  

Opinion: एक परिपक्व नेता के गुण

राहुल गांधी अच्छी तरह जान लें कि एक परिपक्व नेता वहीं माना जाता है जिसका अनुसरण विरोधी भी करते हैं। आज जब उनकी पार्टी के नेता ही उनकी लाइन के विरुद्ध बात कर रहे हैं, तो उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्हें सोचना होगा कि जब वे अपनी बात से अपनी पार्टी के नेताओं को ही सहमत नहीं कर पा रहे हैं, तो आखिर इंडिया गठबंधन के लोग कैसे उन्हें अपना सर्वमान्य नेता मान लेंगे?  उन्हें याद रहना चाहिए कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास भले ही अब खोने के लिए कुछ विशेष नहीं रहा, लेकिन पिछले दिनों जब उनसे राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने भी बड़े राजनीतिक कौशल से उस सवाल को टाल दिया था। क्या वे अखिलेश यादव उन्हें अपना नेता मान लेंगे जो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को महज 50-60 सीटें देने के मूड में हैं।अगर राहुल गांधी वास्तव में राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन को मजबूत देखना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी गलतियों पर भी विचार करना चाहिए। देखना चाहिए कि डीएमके जैसी बड़ी पार्टी की नाराजगी कैसे दूर हो सकती है। उन्हें अपने पार्टी संगठन की मजबूती के साथ ही इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा कि नेताओं के बीच हमेशा बेहतर समन्वय बना रहे, ताकि मुद्दों पर उनकी भाषा असहजता पैदा न करे। राजनीति में सबको साथ लेकर चलने की जरूरत होती है।