Scindia Property Case: ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही संपत्ति के बंटवारे का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस विवाद में परिवार के सदस्यों के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर कानूनी सवाल उठे हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के परिवार से जुड़े इस मामले में प्रतिमा देवी राना ने समझौते के दस्तावेजों पर आपत्ति जताई है। 29 अक्टूबर 2026 को निर्धारित सुनवाई न्यायाधीश के अवकाश पर रहने के कारण टल गई। अब अगली सुनवाई 4 नवंबर को होनी है।
क्या है सिंधिया परिवार की संपत्ति का विवाद?
सिंधिया राजपरिवार की पैतृक संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर की अदालत में लंबे समय से मुकदमा चल रहा है। परिवार की संपत्ति का अनुमानित मूल्य विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में करीब 40 से 41 हजार करोड़ रुपये बताया गया है। इस मामले में संपत्ति में हिस्सेदारी और उसके बंटवारे से जुड़े सवालों पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। हालांकि, संपत्ति की कुल कीमत और प्रत्येक सदस्य के हिस्से को लेकर अंतिम न्यायिक फैसला होना बाकी है।
Scindia Property Case: विवाद में कौन-कौन हैं शामिल?
इस मामले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया और ऊषा राजे सिंधिया सहित परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं। संपत्ति के मूल मुकदमे में परिवार की अलग-अलग सदस्यों ने हिस्सेदारी का दावा किया था। दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को भी मामले में पक्षकार बनाया गया था।
प्रतिमा देवी ने समझौते पर क्यों जताई आपत्ति?
प्रतिमा देवी राना ने संपत्ति बंटवारे के लिए तैयार किए गए प्रस्तावित समझौते पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दस्तावेजों पर उनसे धोखे से हस्ताक्षर कराए गए और समझौते की प्रक्रिया में उनकी सहमति को लेकर सवाल हैं। उन्होंने अदालत में आवेदन देकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। दूसरी ओर, अन्य पक्षों की ओर से समझौते पर सहमति होने की दलील दी गई है। इन आरोपों पर अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।
Scindia Property Case: 4 नवंबर की सुनवाई क्यों अहम है?
अदालत ने प्रतिमा देवी को उनके आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। इसके लिए पहले 29 अक्टूबर की तारीख निर्धारित थी, लेकिन न्यायाधीश के अवकाश पर रहने के कारण सुनवाई आगे बढ़ गई। अब 4 नवंबर को प्रतिमा देवी को अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश करने होंगे। इसके बाद अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेगी।
सुनवाई के बाद क्या बदल सकता है?
4 नवंबर की कार्यवाही में प्रतिमा देवी के साक्ष्य और उनके दावों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा। अदालत यह देखेगी कि समझौते पर उठाई गई आपत्ति के समर्थन में क्या सामग्री प्रस्तुत की जाती है। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई और आवश्यक कानूनी कदम तय हो सकते हैं। फिलहाल, न तो समझौते की वैधता पर अंतिम निर्णय आया है और न ही धोखाधड़ी के आरोप अदालत में साबित हुए हैं। इसलिए संपत्ति के बंटवारे का अंतिम परिणाम आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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