INDIA bloc rally: दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को INDIA ब्लॉक की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली के लिए विपक्षी दलों के बड़े नेता जुटे। राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने रैली में हिस्सा लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से नेता खुली बसों और जीपों में सवार होकर कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल और मिंटो रोड पहुंचे। यहां से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला गया। विपक्ष का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, बीजेपी ने इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर SIR को लेकर विपक्ष इतना आक्रामक क्यों है और इस रैली के पीछे क्या सियासी रणनीति है?
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक ने अपनी ताकत दिखाने के लिए महारैली आयोजित की। इसमें करीब 20 विपक्षी दलों के शामिल होने की बात कही गई। रैली का नारा ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रखा गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के नाम पर लोगों के वोट काटे जा रहे हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला हो रहा है।
रैली से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लगा। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी, फारूक अब्दुल्ला और अन्य नेता खुली बसों और जीपों से मिंटो रोड की ओर रवाना हुए। वहां से रामलीला मैदान तक पदयात्रा की गई। आइए सवाल-जवाब में समझते हैं इस रैली का पूरा सियासी गणित।
सवाल-1: INDIA ब्लॉक ने दिल्ली में महारैली क्यों बुलाई?
जवाब: विपक्षी दलों ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में यह रैली आयोजित की है। SIR के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और पुनरीक्षण करता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
विपक्ष का कहना है कि इससे गरीबों, प्रवासी मजदूरों और उन लोगों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जिनके पास जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसी मुद्दे को लेकर INDIA ब्लॉक ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ का नारा दिया है। राहुल गांधी ने रैली से पहले सोशल मीडिया पर लोगों से दिल्ली पहुंचने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था, ‘वोट बचाओ, देश बचाओ। कनॉट प्लेस आइए, साथ चलते हैं। या सीधे रामलीला मैदान में मिलते हैं।’
INDIA bloc rally: सवाल-2: रैली में कौन-कौन से बड़े नेता शामिल हुए?
जवाब: इस रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेता शामिल हुए। रैली में शामिल प्रमुख नेताओं में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, सुप्रिया सुले, अभिषेक बनर्जी और केसी वेणुगोपाल के नाम शामिल हैं। विपक्षी नेताओं ने पहले खरगे के आवास पर मुलाकात की। इसके बाद वे खुली बसों और जीपों में सवार होकर मिंटो रोड पहुंचे। यहां से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला गया।
हालांकि, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के रैली में शामिल नहीं होने की खबर सामने आई। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के इसमें शामिल होने की जानकारी दी गई। इससे पहले हेमंत सोरेन विपक्षी नेताओं की मॉक संसद में शामिल हुए थे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रैली में 10 लाख से ज्यादा लोगों के पहुंचने का दावा किया था।

सवाल-3: तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव ने क्या कहा?
जवाब: दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर निशाना साधते हुए मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाए।
तेजस्वी यादव ने CEC पर साधा निशाना
RJD नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि INDIA ब्लॉक की सभी पार्टियां ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के मुद्दे पर एकजुट हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में वोटों की चोरी हो रही है और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीने जा रहे हैं। तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्होंने वोटों की चोरी में मदद की है। ये तेजस्वी के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित तथ्यों और चुनाव आयोग के पक्ष के आधार पर होनी चाहिए।
अखिलेश यादव ने ‘डबल इंजन’ सरकार पर कसा तंज
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने खुद 1 करोड़ 27 लाख वोट गायब होने की बात कही थी। अखिलेश ने सवाल उठाया कि इतने बड़े आंकड़े का आधार क्या है। उन्होंने ‘डबल इंजन’ सरकार पर तंज कसते हुए उसे ‘डबल जीरो’ बताया। अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव में हार के बाद मतगणना को लेकर चुनाव आयोग से दोबारा गिनती की मांग की गई।
INDIA bloc rally: सवाल-4: बीजेपी ने INDIA ब्लॉक की रैली पर क्या प्रतिक्रिया दी?
जवाब: बीजेपी ने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक दिखावा बताते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनी हुई सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस त्योहारों के समय व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने और देश को बदनाम करने का काम कर रही है। नड्डा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को भूला नहीं है।

दरअसल, 1 नवंबर को बीजेपी और सिख समुदाय के कुछ सदस्यों ने पश्चिमी दिल्ली में कांग्रेस के खिलाफ विरोध मार्च भी निकाला। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मार्च की अगुवाई की। यह मार्च हरि नगर DTC बस डिपो से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक निकाला गया। इस तरह दिल्ली में एक तरफ INDIA ब्लॉक SIR के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहा था, तो दूसरी तरफ बीजेपी 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस को घेर रही थी।
सवाल-5: क्या रैली से दिल्ली की सड़कों पर जाम लगा?
जवाब: रैली को देखते हुए मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था बदली गई, लेकिन पुलिस ने जरूरी सेवाओं के लिए रास्ते खुले रखने की बात कही। रामलीला मैदान और मिंटो रोड के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस और स्वयंसेवकों को भीड़ संभालने के लिए तैनात किया गया। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, सुबह 5:30 बजे से ही लोग रामलीला मैदान पहुंचने लगे थे।
ट्रैफिक पुलिस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए। अधिकारियों ने बताया कि ITO पर यातायात सामान्य था, लेकिन मिंटो रोड से नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के बीच आने-जाने वाले वाहनों को कुछ परेशानी हो सकती थी।
INDIA bloc rally: सवाल-6: SIR का मुद्दा विपक्ष के लिए इतना अहम क्यों है?
जवाब: विपक्ष इसे सिर्फ मतदाता सूची में बदलाव का मामला नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बना रहा है।
SIR के तहत मतदाता सूची की जांच की जाती है। चुनाव आयोग का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखना और अपात्र या दोहराए गए नामों को हटाना है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं हटना चाहिए। विपक्षी दलों की चिंता है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हट जाता है तो वह चुनाव में मतदान नहीं कर पाएगा। इसलिए वे चुनाव आयोग से प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और मतदाताओं को पर्याप्त मौका देने की मांग कर रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया बताया गया है। ऐसे में असली सवाल यह है कि प्रक्रिया के दौरान कितने पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।
सवाल-7: INDIA ब्लॉक की एकजुटता के पीछे क्या है सियासी रणनीति?
जवाब: विपक्ष SIR के मुद्दे के जरिए अलग-अलग राज्यों के दलों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाने की कोशिश कर रहा है। INDIA ब्लॉक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, RJD, DMK, NCP (शरद पवार गुट), नेशनल कॉन्फ्रेंस और वामपंथी दलों समेत कई पार्टियां शामिल हैं। इन दलों की राजनीति और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, लेकिन SIR के मुद्दे पर वे एक साथ दिखाई दे रहे हैं। इस एकजुटता के पीछे तीन प्रमुख राजनीतिक मकसद समझे जा सकते हैं।
पहला- साझा मुद्दे पर विपक्ष को एक मंच देना: अलग-अलग राज्यों में चुनावी राजनीति करने वाले दल SIR को राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर अपनी आवाज एक साथ उठाना चाहते हैं। दूसरा- चुनाव आयोग पर दबाव बनाना: विपक्ष चाहता है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर उसकी आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। तीसरा- बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक एकजुटता दिखाना: विपक्षी दल यह संदेश देना चाहते हैं कि चुनावी और लोकतांत्रिक मुद्दों पर वे मिलकर सरकार को चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, रैली में एक मंच पर आना और चुनाव के समय एकजुट होकर रणनीति बनाना अलग-अलग बातें हैं। विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और क्षेत्रीय राजनीतिक हितों को लेकर मतभेद भी INDIA ब्लॉक की बड़ी चुनौती हैं।
INDIA bloc rally: सवाल-8: क्या इस रैली से विपक्ष को राजनीतिक फायदा मिलेगा?
जवाब: रैली से विपक्ष को अपनी एकजुटता दिखाने और SIR के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का मौका मिला है। लेकिन इसका चुनावी फायदा कितना होगा, यह आगे की राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा। रामलीला मैदान की रैली के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर सभी दल एक साथ खड़े हैं। राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी और अखिलेश यादव तक बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है। लेकिन विपक्ष के सामने चुनौती यह भी है कि वह इस एकजुटता को लगातार बनाए रखे। केवल एक रैली से चुनावी समीकरण नहीं बदलते। इसके लिए साझा रणनीति, राज्यों में तालमेल और जनता के बीच मुद्दे को लगातार उठाना जरूरी होगा।
दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की महारैली केवल SIR के विरोध तक सीमित नहीं है। इसके जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है। वहीं, बीजेपी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों और व्यापारियों को होने वाली संभावित परेशानी के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा है। अब देखना होगा कि रामलीला मैदान से उठी विपक्ष की यह आवाज आगे कितना राजनीतिक असर डालती है और SIR को लेकर चुनाव आयोग तथा सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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