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क्या 2028 में राष्ट्रपति बनने के लिए ट्रंप से अलग राह अपना रहे जेडी वेंस?

JD Vance:

JD Vance: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद अब सार्वजनिक होते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों में नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस हार के बाद जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को रिपब्लिकन पार्टी की हार की प्रमुख वजह बताया है। वहीं, ट्रंप अब भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले का बचाव कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2028 में राष्ट्रपति पद की दावेदारी मजबूत करने के लिए वेंस ट्रंप से अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं?

JD Vance: जेडी वेंस ने मिडटर्म चुनाव में हार के लिए ईरान युद्ध को बताया जिम्मेदार

अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल किया। इस नतीजे को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर की। इसमें उन्होंने कहा कि 2024 में ट्रंप और वेंस को वोट देने वाले कई मतदाताओं ने 2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स का समर्थन किया। वेंस ने लिखा, “मुख्य समस्या यह है कि जिन बहुत से लोगों ने 2024 में ट्रंप/वेंस को वोट दिया था, उन्होंने 2026 में डेमोक्रेट्स को वोट दिया।”

JD Vance: जेडी वेंस ने बताए मतदाताओं के पाला बदलने के 4 कारण

वेंस ने अपनी पोस्ट में एक पोलस्टर के सर्वे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं ने रिपब्लिकन पार्टी का साथ छोड़कर डेमोक्रेट्स को वोट दिया, उनके सामने कुछ प्रमुख मुद्दे थे।

इनमें सबसे प्रमुख चार कारण बताए गए हैं।

– ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करना।
– महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत पर ध्यान देना।
– अमेरिका फर्स्ट की नीति को प्राथमिकता देना।
– इजरायल के साथ अमेरिका के संबंधों में बदलाव करना।

वेंस ने ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव को लेकर कूटनीतिक समाधान की वकालत करने वाले लोगों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक सलाह सही साबित हुई। अपनी पोस्ट में वेंस ने यह भी कहा कि अगर कोई यह तर्क देना चाहता है कि अगले छह वर्षों के लिए सीनेट गंवाना ईरान युद्ध की उचित कीमत थी, तो उसे खुलकर यह बात कहनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की हार की वजह युद्ध था।

ट्रंप ने भी माना, ईरान युद्ध से चुनाव में हुआ नुकसान

जेडी वेंस के बयान के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान युद्ध के चुनावी असर को स्वीकार किया। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई के फैसले का बचाव किया। ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध की वजह से कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर उन्हें दोबारा ऐसा फैसला लेने का मौका मिले, तो वह फिर से यही करेंगे। ट्रंप के मुताबिक, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है और लंबे समय के लिहाज से सैन्य कार्रवाई ही इसका समाधान है। इस तरह वेंस ने जहां चुनावी हार के लिए युद्ध को जिम्मेदार ठहराया, वहीं ट्रंप ने इसके बावजूद अपने फैसले को सही बताया।

क्या 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए अलग राह बना रहे हैं वेंस?

जेडी वेंस के ताजा बयान को 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की संभावनाओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वेंस को रिपब्लिकन पार्टी के संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवारों में गिना जाता है। हालांकि, उन्होंने अभी तक अपनी उम्मीदवारी का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप से अलग रुख अपनाना उनके लिए राजनीतिक रूप से अहम हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि युद्ध, महंगाई और अमेरिका की विदेश नीति जैसे मुद्दों पर नाराज मतदाताओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाना उनके राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो को भी रिपब्लिकन पार्टी के संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवारों में देखा जाता है। ऐसे में 2028 की दावेदारी को लेकर पार्टी के भीतर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी अहम रहने वाली है।

पहले भी ईरान युद्ध पर ट्रंप से अलग राय रख चुके हैं वेंस

यह पहली बार नहीं है जब जेडी वेंस ने ईरान और इजरायल से जुड़े मुद्दों पर ट्रंप से अलग रुख दिखाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने से पहले भी वेंस इस फैसले को लेकर आशंकित थे। इसके अलावा, वेंस ने पहले भी मध्य पूर्व में अमेरिका की नीतियों को लेकर कहा था कि वाशिंगटन को अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने इजरायल सरकार के कुछ सदस्यों पर अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने और ईरान के साथ बातचीत में बाधा डालने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था। इससे पहले वह ईरान के साथ लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के खिलाफ अपनी चिंताएं जाहिर कर चुके हैं।

अब ट्रंप के सामने क्या होगी चुनौती?

मिडटर्म चुनावों में हार के बाद ट्रंप प्रशासन के सामने ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। एक तरफ ट्रंप सैन्य कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ वेंस युद्ध को खत्म करने और मतदाताओं की नाराजगी दूर करने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में ट्रंप के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ ईरान के साथ अपने रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करना है, तो दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के भीतर उभर रहे मतभेदों को संभालना है। वहीं, जेडी वेंस के ताजा बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि वह ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप से कुछ राजनीतिक दूरी बनाना चाहते हैं। हालांकि, इसे 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनकी औपचारिक रणनीति कहना अभी जल्दबाजी होगी। आने वाले समय में दोनों नेताओं के बीच यह मतभेद किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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