Home » एक्सप्लनेर » कौन है बबलू श्रीवास्तव जिसके नाम से दाऊद इब्राहिम के भी छूटते थे पसीने?

कौन है बबलू श्रीवास्तव जिसके नाम से दाऊद इब्राहिम के भी छूटते थे पसीने?

Babloo Srivastava:

Babloo Srivastava: एक वक्त पर जिस इंटरनेशनल गैंगस्टर ने दाऊद इब्राहिम को भी खौफ में रखा था। आज उसी ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ (बबलू श्रीवास्तव) को सीबीआई कोर्ट ने 6 नवंबर 2026 को पुराने रंगदारी और धमकी के मामले से बरी कर दिया है। यह मामला करीब 27 साल पुराना था। बबलू श्रीवास्तव की बरी होने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अगर बबलू श्रीवास्तव फिर से कोई गलत काम करता है तो वह पीले बुलडोजर का शिकार होगा। खबर इंडिया के इस विशेष एक्सप्लेनर में जानिए कौन है बबलू श्रीवास्तव, क्यों दाऊद इब्राहिम खाते थे बबलू श्रीवास्तव के नाम से खौफ और कैसे आईएएस बनने की जगह रखा जुर्म की दुनिया में कदम?

Babloo Srivastava: कौन है बबलू श्रीवास्तव?

ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू श्रीवास्तव की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है। अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले बबलू श्रीवास्तव बिल्कुल सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन यापन कर रहा था। उनके पिता विश्वनाथ प्रताप श्रीवास्तव, सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (GTI) में प्रिंसिपल थे। बबलू श्रीवास्तव के पिता चाहते थे कि बबलू बड़े होकर आईएएस ऑफिसर बने। घर में माहौल भी पढ़ने-लिखने वाला था। पिता विश्वनाथ प्रताप श्रीवास्तव सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्रिंसिपल थे तो बड़ा भाई सेना में कर्नल रह चुके हैं। बबलू श्रीवास्तव बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे। उन्होंने गाजियाबाद के लखनऊ यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की थी। बड़े भाई के कर्नल वाली यूनिफॉर्म देखकर बबलू श्रीवास्तव ने यह ठान लिया था कि वह आईएएस ऑफिसर बनेंगे। लेकिन किसने सोचा था कि जिस व्यक्ति का सपना आईएएस अधिकारी बनने का था, वह देश का चर्चित अपराधी बन गया है।

Babloo Srivastava: कैसे रखा जुर्म की दुनिया में कदम?

बबलू श्रीवास्तव की जिंदगी में साल 1982, एक बड़ा मोड़ लेकर आया। उस समय वह लखनऊ यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान उसके दोस्त नीरज जैन ने विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में महामंत्री पद के लिए नामांकन दाखिल किया। दोस्त होने के नाते बबलू भी उसके चुनाव प्रचार में सक्रिय हो गया।

इसी चुनाव के दौरान एक दिन बबलू और विरोधी छात्र गुट के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि एक छात्र को चाकू मार दिया गया। बताया जाता है कि घायल छात्र का संबंध उस समय के चर्चित अपराधी अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना से था। इस घटना के बाद बबलू का नाम भी आपराधिक गतिविधियों से जुड़ने लगा। यहीं से उसकी जिंदगी ने ऐसी दिशा पकड़ ली, जिसने आगे चलकर उसे अपराध की दुनिया का बड़ा नाम बना दिया।

रामगोपाल मिश्रा के गैंग में कैसे शामिल हुआ बबलू श्रीवास्तव?

इस घटना के बाद बबलू की मुलाकात रामगोपाल मिश्रा से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, रामगोपाल मिश्रा और अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना के बीच पहले से दुश्मनी थी। धीरे-धीरे बबलू रामगोपाल मिश्रा के संपर्क में आया और उसके गिरोह से जुड़ गया। इसके बाद बबलू की गतिविधियां छात्र राजनीति और छोटे-मोटे विवादों से निकलकर संगठित अपराध की तरफ बढ़ने लगीं। गिरोह के साथ जुड़ने के बाद उसका संपर्क अपराध जगत के दूसरे लोगों से भी बढ़ा। धीरे-धीरे उसने अपहरण, फिरौती और वसूली जैसे अपराधों की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।

बबलू श्रीवास्तव और दाऊद इब्राहिम की दुश्मनी का एक दिलचस्प पहलू उसकी गिरफ्तारी से भी जुड़ा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का दावा था कि दाऊद के लोगों ने ही इंटरपोल को बबलू के सिंगापुर पहुंचने की सूचना दी थी। इसके बाद अप्रैल 1995 में सिंगापुर में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसी रिपोर्ट में बताया गया था कि दोनों के बीच कारोबारी हितों के टकराव के कारण पुरानी दुश्मनी थी। बबलू ने बाद में अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई थी और दावा किया था कि दाऊद के लोग उसे मारना चाहते हैं। हालांकि, गिरफ्तारी में दाऊद की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यह भी पढ़े- कौन हैं स्टीफन मिलर, जिन पर ट्रंप ने एक बार फिर जताया भरोसा? कॉलेज पॉलिटिक्स से व्हाइट हाउस तक की कहानी