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‘मुसलमान किसी का गुलाम नहीं’, योगी-मोदी के समर्थन में क्या बोले मुस्लिम समाज के लोग?

2027 चुनाव से पहले मुस्लिम वोटरों की क्या है राय?
2027 चुनाव से पहले मुस्लिम वोटरों की क्या है राय?

Yogi Government: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। एक तरफ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव विपक्षी एकजुटता की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में भी आवाजें सुनाई दे रही हैं। इस बीच मुसलमानों के बीच योगी सरकार की नीतियों, बुलडोजर कार्रवाई, सरकारी योजनाओं और अखिलेश यादव की राजनीति को लेकर क्या विचार हैं? क्या मुस्लिम समाज का एक वर्ग बीजेपी के साथ जुड़ रहा है? इन्हीं सवालों को लेकर ख़बर इंडिया ने लोगों से उनकी राय जानी। इस दौरान कुछ लोगों ने योगी और मोदी सरकार के कामों की तारीफ की, जबकि कुछ मुद्दों पर सवाल भी उठाए गए।

Yogi Government: मुसलमानों के हित में काम करने वाले का साथ
ख़बर इंडिया से बातचीत में एक व्यक्ति ने कहा कि मुसलमान किसी एक राजनीतिक दल या नेता के बंधे हुए नहीं हैं। उनका कहना था कि मुस्लिम समाज उसी के साथ रहेगा, जो उनके भविष्य और विकास के लिए काम करेगा। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी ने मुसलमानों के लिए योजनाएं शुरू की हैं, इसलिए मुस्लिम समाज का एक वर्ग उनके समर्थन में है।उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी का गुलाम या कर्मचारी नहीं है। अगर कोई सरकार उनके हित में काम करती है तो वे उसका साथ देंगे, लेकिन अगर वही सरकार उनके खिलाफ काम करेगी तो वे उससे भी दूरी बना सकते हैं।उनके मुताबिक, मुसलमानों को केवल एक राजनीतिक दल का समर्थक मानना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति मुसलमानों के प्रति अच्छा व्यवहार करता है, समाज उसके साथ जुड़ जाता है।
योगी सरकार में मुस्लिमों के विकास का दावा

एक अन्य व्यक्ति ने योगी आदित्यनाथ के समर्थन में कहा कि उनकी सरकार ने मुसलमानों को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है। उन्होंने दावा किया कि अब मुस्लिम समाज के लोग केवल छोटे-मोटे कामों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आईएएस, पीसीएस, न्यायाधीश और वकील जैसे पदों पर भी पहुंच रहे हैं।उन्होंने इसके लिए वर्तमान सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताया। साथ ही आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में मुसलमानों को केवल मजदूरी और राजनीतिक कार्यक्रमों में दरी बिछाने तक सीमित रखा गया।उनका कहना था कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जिन लोगों ने राजनीतिक कार्यक्रमों में काम किया, उन्हें भी उचित सम्मान नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार मंचों पर ऐसे लोगों को अपमानित किया गया।

Yogi Government: बुलडोजर कार्रवाई पर क्या बोले लोग?

योगी सरकार की बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी सवाल किए गए। इस पर सरकार के समर्थकों ने कहा कि कार्रवाई किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि गलत काम करने वालों के खिलाफ की जा रही है।एक व्यक्ति ने सवाल उठाया कि अगर बुलडोजर कार्रवाई केवल मुसलमानों के खिलाफ होती है, तो दिल्ली और उत्तर प्रदेश के दूसरे इलाकों में हिंदुओं के मकान और दुकानें क्यों तोड़ी गईं? उन्होंने मेरठ में हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया।जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार की बुलडोजर कार्रवाई सही है, तो उन्होंने कहा कि एक भी ऐसी जगह बता दी जाए, जहां अवैध निर्माण के बिना कार्रवाई की गई हो।वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि सरकार का अभियान गलत काम करने वालों के खिलाफ है। इसमें बुलडोजर कार्रवाई के साथ अपराधियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई भी शामिल है। उनके मुताबिक, कानून तोड़ने वाले व्यक्ति के धर्म को देखकर कार्रवाई नहीं की जाती।

आजम खान को लेकर भी हुई चर्चा

इस दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का मुद्दा भी उठा। जब एक व्यक्ति से पूछा गया कि क्या वे आजम खान को अपने साथ घर ले जाएंगे, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनका इलाज चल रहा है और उनका सही इलाज हो रहा है।इसके बाद आजम खान के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई पर सवाल किए गए। एक व्यक्ति ने कहा कि यह कानूनी मामला है और इसका फैसला अदालत को करना है।उन्होंने आजम खान के बेटे के उस कथित बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि आजम खान ने विश्वविद्यालय बनवाया, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है। इस पर उन्होंने कहा कि कार्रवाई विश्वविद्यालय बनाने के कारण नहीं, बल्कि मजदूरों और किसानों की जमीन पर कब्जे से जुड़े आरोपों के कारण हुई है।उन्होंने यह भी दावा किया कि आजम खान के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने वाले लोग भी मुस्लिम समुदाय से ही हैं। उनके मुताबिक, जिन लोगों के अधिकारों का हनन हुआ या जिनके साथ धोखा हुआ, उन्होंने ही कानूनी शिकायतें कीं।हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में सही या गलत का अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।

Yogi Government: अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की सक्रियता को लेकर भी सवाल पूछे गए। इस पर एक व्यक्ति ने कहा कि देश में जब भी परेशानी या अव्यवस्था की स्थिति आई है, तब महात्मा गांधी और मौलाना आजाद जैसे नेता सामने आए हैं। उनका मानना है कि मौजूदा समय में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को ऐसी परिस्थितियों से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ को बहस की चुनौती दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे हर देशवासी के साथ चर्चा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ऐसे लोगों से बहस नहीं करेंगे, जिन पर विदेशी फंडिंग के जरिए देश को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं।उन्होंने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जबकि भारत सुरक्षित है। उनके मुताबिक, रूस और अमेरिका जैसे देशों के बीच तनाव के मामलों में भी भारत की भूमिका पर दुनिया की नजर रहती है।अखिलेश यादव को लेकर एक व्यक्ति ने कहा कि जो अपने पिता का नहीं हुआ, वह मुसलमानों का कैसे हो सकता है। यह टिप्पणी उन्होंने अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में की।

मुसलमानों को योगी के नाम से डरने की जरूरत नहीं: रियासत अली

कार्यक्रम में शामिल रियासत अली ने कहा कि मुसलमानों को योगी आदित्यनाथ के नाम से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मुसलमान केवल अल्लाह से डरता है और किसी राजनीतिक नेता से डरकर अपना फैसला नहीं करता।उन्होंने इस्लाम के कलमे का जिक्र करते हुए कहा कि जब मुसलमान यह मानता है कि अल्लाह के अलावा कोई पूजनीय नहीं है, तो उसे किसी दूसरे व्यक्ति से डरने की जरूरत नहीं है।रियासत अली ने आयुष्मान कार्ड योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इस योजना से मुस्लिम परिवारों को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिन परिवारों में छह सदस्य हैं, उन्हें इस योजना का फायदा मिल सकता है। उनका कहना था कि ऐसी योजनाओं से मुस्लिम समाज को भी लाभ मिल रहा है।उन्होंने कहा कि मुसलमानों के भविष्य के लिए जो काम करेगा, समाज उसी का समर्थन करेगा। उनके मुताबिक, नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ ने मुस्लिम समुदाय के लिए योजनाएं चलाई हैं, इसलिए कई लोग उनके साथ खड़े हैं।

Yogi Government: योगी के समर्थन में बड़ी संख्या में मुस्लिम पहुंचे

आसिफ अली नाम के एक व्यक्ति ने कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौजूदगी को लेकर कहा कि यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं। उनके मुताबिक, इस आयोजन में हजारों मुस्लिम लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि बीजेपी और योगी सरकार के खिलाफ फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने की जरूरत है।उन्होंने दावा किया कि गाजियाबाद से ही करीब 4 से 5 हजार मुस्लिम लोग कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में बता रहे हैं।आसिफ अली ने कहा कि पिछले करीब 70 वर्षों में मुस्लिम समाज ने कभी कांग्रेस तो कभी समाजवादी पार्टी का समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। उन्होंने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम समाज आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है।उनका कहना था कि मुस्लिम समुदाय को ऐसे लोगों और राजनीतिक दलों के साथ जुड़ना चाहिए, जो विकास की बात करते हैं। उन्होंने बीजेपी को ऐसा ही एक राजनीतिक विकल्प बताया।

समाजवादी पार्टी और योगी सरकार के कामकाज की तुलना

जब आसिफ अली से पूछा गया कि अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ की सरकार में मुसलमानों के लिए किसका कार्यकाल बेहतर रहा, तो उन्होंने योगी सरकार का नाम लिया।उन्होंने कहा कि पिछले करीब 10 वर्षों में उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी और अराजकता कम हुई है। उनके मुताबिक, पहले जिन लोगों का दबदबा था, वे ही अब सरकार की कार्रवाई से परेशान हैं।उन्होंने यह भी कहा कि योगी सरकार के समर्थन में केवल हिंदू या मुस्लिम ही नहीं, बल्कि सिख, ईसाई और जैन समुदाय के लोग भी सामने आ रहे हैं। उनका दावा था कि अलग-अलग समुदायों के लोग आपसी भाईचारा बढ़ाने और सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए साथ आ रहे हैं।

Yogi Government: ओवैसी की राजनीति पर भी उठाए सवाल

मुस्लिम समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के दावे को लेकर असदुद्दीन ओवैसी का मुद्दा भी उठा। एक व्यक्ति ने कहा कि ओवैसी मुसलमानों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन उन्हें आजम खान के समर्थन में भी सामने आना चाहिए।उन्होंने सवाल किया कि अगर ओवैसी मुस्लिम समाज के हितों के लिए आवाज उठाते हैं, तो आजम खान के मामले में उनके समर्थन में धरने पर क्यों नहीं बैठते?उन्होंने यह भी कहा कि ओवैसी अपने क्षेत्र में भी राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि, इस दौरान एक व्यक्ति ने खुद को किसी राजनीतिक दल का नेता या कार्यकर्ता नहीं, बल्कि यूनाइटेड मेडिकल वेलफेयर एसोसिएशन का अध्यक्ष बताया। उन्होंने कहा कि वे संविधान और लोकतंत्र को बचाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे।उनका सवाल था कि अगर ओवैसी योगी सरकार के खिलाफ लगातार बयान देते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती, जबकि आजम खान को जेल जाना पड़ा?इस पर जवाब देते हुए एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि ओवैसी मुस्लिम समाज को बहकाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय किसी के बहकावे में आने वाला नहीं है और अपनी समझ से राजनीतिक फैसला करेगा।

2027 में फिर बीजेपी की सरकार बनने का दावा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी लोगों ने अपनी राय रखी। जब उनसे पूछा गया कि क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी मिलकर योगी सरकार को सत्ता से बाहर कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से सरकार नहीं गिरती।एक व्यक्ति ने कहा कि अखिलेश यादव अपनी जीत का सपना देख सकते हैं और यह उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन उनके मुताबिक 2027 में उनका यह सपना पूरा नहीं होगा।उन्होंने दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी और योगी आदित्यनाथ फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के समर्थन में जुटी भीड़ को देखकर उन्हें लगता है कि मुख्यमंत्री एक बार फिर मजबूत स्थिति के साथ वापसी करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से जो भ्रम फैलाया गया है, उसे दूर करने के लिए वे लोगों तक सरकार की योजनाओं और कामों की जानकारी पहुंचा रहे हैं।इस तरह ख़बर इंडिया के इस वीडियो में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने योगी और मोदी सरकार की योजनाओं, बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर अपनी राय रखी। वहीं, अखिलेश यादव, आजम खान और असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति पर भी सवाल उठाए गए। हालांकि, वीडियो में शामिल लोगों के विचार उनके व्यक्तिगत दावे और राजनीतिक राय हैं, इन्हें पूरे मुस्लिम समुदाय की एक जैसी सोच नहीं माना जा सकता।