DELHI BLAST: दिल्ली में हुए कार बम विस्फोट (जिसमें 13 लोगों की मौत हुई) की जांच में दुबई तक के संभावित संबंध मिले हैं। जांच के नए सुरागों से मामले की बड़ी परतें खुली हैं और सुरक्षा एजेंसियाँ अब अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की दिशा में सक्रिय हो गई हैं।
दुबई तक पहुंची जांच की कड़ी
DELHI BLAST: जांच में पाया गया है कि गिरफ्तार आरोपी डॉ. आदिल अहमद राठेर के परिवारिक संबंध और उनकी पूछताछ ने दुबई में रहने वाले उनके भाई मुज़ज़फर राठेर तक के संबंध उजागर किए हैं। जांचकर्ता यह भी पक्का करने की कोशिश कर रहे हैं कि दुबई यात्रा धन जुटाने और पाकिस्तानी संपर्कों से मिलने के उद्देश्य से हुई थी या नहीं।
परिवार और आतंकी रिश्तों पर नजर
DELHI BLAST: डॉ. आदिल राठेर, जो अनंतनाग सरकारी मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ रेजिडेंट के रूप में कार्यरत थे, ने पूछताछ में बताया कि उनका भाई मुज़ज़फर पाकिस्तान से होते हुए दुबई गया था। अब एजेंसियाँ यह जांच रही हैं कि क्या उसका जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से सीधा संपर्क था और दुबई जाने का उद्देश्य आतंक से जुड़ी गतिविधियों के लिए धन जुटाना तो नहीं था।
डीएनए रिपोर्ट से खुला बड़ा राज़
DELHI BLAST: डीएनए जांच में पुष्टि हुई कि विस्फोटित i20 कार में मिली हड्डियाँ, दांत और कपड़े हरियाणा के डॉक्टर डॉ. उमर मोहम्मद के ही थे। वे फरीदाबाद के अल-फ़लाह विश्वविद्यालय में वरिष्ठ डॉक्टर के रूप में कार्यरत थे। डीएनए नमूनों का मिलान उनकी मां और भाई से हुआ, जो 100% मैच था।
फरीदाबाद छापेमारी से टली बड़ी तबाही
DELHI BLAST: फरीदाबाद में हुई छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो आवासीय इमारतों से करीब 3,000 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया। जांचकर्ताओं का मानना है कि यही कार्रवाई एक बड़े आतंकी हमले को टालने में निर्णायक साबित हुई।
‘सफेदपोश’ नेटवर्क का खुलासा
DELHI BLAST: पकड़े गए अन्य संदिग्धों में डॉ. मुज़म्मिल शकील का नाम भी सामने आया है। उन्हें “सफेदपोश” आतंकवादी तंत्र की एक अहम कड़ी माना जा रहा है, जो जम्मू-कश्मीर से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक फैला था।
बाबरी बरसी पर धमाके की साजिश
DELHI BLAST: जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने 6 दिसंबर, यानी बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी, को छह अलग-अलग जगहों पर विस्फोट की योजना बनाई थी। पूछताछ में पकड़े गए आतंकवादियों ने स्वीकारा कि यह तारीख प्रतीकात्मक “बदला” लेने के लिए चुनी गई थी।
आगे क्या
DELHI BLAST: जांच एजेंसियाँ अब दुबई और पाकिस्तान स्थित संपर्कों की पहचान करने के साथ-साथ धन की आवाजाही और कम्युनिकेशन चैनल की जांच में जुटी हैं। शुरुआती इनपुट और राज्यों के समन्वय से कई बड़े हमले रोके गए, लेकिन जांच अब भी जारी है।
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