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WEST BENGAL: बाबरी मस्जिद निर्माण की घोषणा पर बंगाल में बढ़ा विवाद, विहिप ने टीएमसी पर लगाया आरोप

WEST BENGAL: पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद को लेकर दिए गए राजनीतिक बयानों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। टीएमसी विधायक और पूर्व मंत्री हुमायूं कबीर द्वारा 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में नई खाई खिंच गई है।

इस घोषणा पर देशभर में सक्रिय हिंदू संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है, जिनमें विश्व हिंदू परिषद (विहिप) भी शामिल है। विहिप ने इसे “अनावश्यक उकसावे” और “राजनीतिक ध्रुवीकरण” का प्रयास बताया है।

टीएमसी धार्मिक ध्रुवीकरण के एजेंडे पर चल रही

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में दावा किया कि टीएमसी नेता बाबरी मस्जिद के नाम पर राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने हुमायूं कबीर की घोषणा को “राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित” बताया और आरोप लगाया कि ऐसी पहल से राज्य के सामुदायिक माहौल पर असर पड़ सकता है। बंसल ने टीएमसी नेतृत्व पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी “धार्मिक रूप से संवेदनशील मुद्दे” को फिर से उठाकर अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है।

WEST BENGAL: टीएमसी में बयानबाज़ी का राजनीतिक असर

हुमायूं कबीर के बयान से टीएमसी पर राजनीतिक दबाव बढ़ा है, क्योंकि 6 दिसंबर की तारीख पहले से ही ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में ध्रुवीकरण की नई पंक्ति खींच सकता है खासकर जब राज्य में पहले से ही कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव को लेकर आरोप–प्रत्यारोप चल रहे हैं।

WEST BENGAL: विहिप ने हिंसा का भी मुद्दा उठाया

अपनी प्रतिक्रिया में विहिप ने मुर्शिदाबाद और बेलडांगा जैसी जगहों पर हाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार को पहले “कानून-व्यवस्था और सुरक्षा” पर ध्यान देना चाहिए। संगठन ने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों को बार-बार उभारना परिस्थितियों को और अस्थिर कर सकता है।

आगे क्या? 

बाबरी मस्जिद निर्माण की घोषणा और उस पर आए कड़े बयानों के बाद यह मामला अब सिर्फ टीएमसी–विहिप विवाद नहीं रह गया है, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े सांप्रदायिक–राजनीतिक विमर्श की ओर बढ़ता दिख रहा है। राज्य सरकार की ओर से अभी इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्माने की संभावना है।

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