Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की व्यापक रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण से निपटने के लिए सुझाए गए दीर्घकालिक उपायों को बिना देरी लागू किया जाना चाहिए और सभी संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने उपायों के तत्काल क्रियान्वयन पर दिया जोर
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सीएक्यूएम द्वारा दायर रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि सुझाए गए उपायों को तत्काल लागू किया जाना चाहिए।
पीठ ने सभी संबंधित हितधारकों को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी कार्ययोजना चार सप्ताह के भीतर कोर्ट में प्रस्तुत करें।
Supreme Court: वाहनों को बताया प्रदूषण का मुख्य कारण
सीएक्यूएम की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन क्षेत्र है।
आयोग ने कई अहम सुझाव दिए हैं, जिनमें शामिल हैं:
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अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना
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पीयूसी 2.0 व्यवस्था को मजबूत करना
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मेट्रो और रेलवे नेटवर्क का विस्तार
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अतिरिक्त आरआरटीएस कॉरिडोर विकसित करना
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इलेक्ट्रिक वाहन नीति में सुधार
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पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर बेहतर प्रोत्साहन
सीएक्यूएम की सिफारिशों पर आपत्ति स्वीकार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीएक्यूएम की सिफारिशों पर किसी भी प्रकार की आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम, पड़ोसी राज्यों के प्रशासन और अन्य एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें। पीठ ने यह भी कहा कि अब समय बहस का नहीं, बल्कि कार्रवाई का है।इसके साथ ही अदालत ने एमिकस क्यूरी को अतिरिक्त दीर्घकालिक उपाय सुझाने की अनुमति दी है, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर सीएक्यूएम अपनी पूरक रिपोर्ट में शामिल कर सकता है।
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