Bihar News: बिहार में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या अब 1,00,044 के पार पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री Mangal Pandey ने विधान परिषद में यह जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के 13 जिलों को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा गया है। इन जिलों में संक्रमण की रफ्तार सामान्य से अधिक तेज पाई गई है। सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता और व्यापक स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा मामले?
राजधानी पटना इस सूची में सबसे ऊपर है। यहां अब तक 8,270 एचआईवी संक्रमित मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, जो राज्य में सर्वाधिक है। इसके बाद गया में 5,760, मुजफ्फरपुर में 5,520, सीतामढ़ी में 5,026, बेगूसराय में 4,716 और भागलपुर में 3,078 मामले दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संक्रमण का प्रभाव अधिक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़ी आबादी, प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही और सामाजिक गतिशीलता संक्रमण के प्रसार को बढ़ावा दे सकती है।
Bihar News: आखिर क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों के पीछे कई सामाजिक और व्यवहारिक कारण सामने आ रहे हैं। जागरूकता की कमी, समय पर जांच न कराना, असुरक्षित यौन संबंध और बीमारी से जुड़ा सामाजिक कलंक प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। कई बार लोग संक्रमण की आशंका के बावजूद जांच कराने से बचते हैं, जिससे बीमारी का प्रसार अनजाने में होता रहता है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्था Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, नियमित जांच, सुरक्षित व्यवहार और समय पर उपचार से संक्रमण की दर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन जागरूकता की कमी इस दिशा में बड़ी चुनौती बनी हुई है।
Bihar News: जांच और इलाज की क्या है व्यवस्था?
राज्य सरकार का कहना है कि एचआईवी की रोकथाम और उपचार के लिए व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। बिहार के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 196 समेकित परामर्श एवं जांच केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर एचआईवी की मुफ्त जांच, काउंसलिंग और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की सुविधा उपलब्ध है। सरकार का दावा है कि जांच केंद्रों की संख्या बढ़ने से अधिक लोग सामने आ रहे हैं, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो रही है और मरीजों को समय पर इलाज मिल पा रहा है।
संक्रमितों को मिल रही आर्थिक मदद
एचआईवी संक्रमित लोगों को सामाजिक और आर्थिक सहयोग देने के लिए राज्य सरकार ‘बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना’ चला रही है। इस योजना के तहत प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति को 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। साथ ही 18 वर्ष से कम आयु के दो आश्रित बच्चों को 1,000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक मदद प्रदान की जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 63.81 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि यह सहायता संक्रमित लोगों को उपचार जारी रखने और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करती है।
Bihar News: आगे की राह: जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। खासकर पटना समेत हाई रिस्क जिलों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, स्कूल-कॉलेज स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने और सामाजिक भेदभाव को खत्म करने की आवश्यकता है। जब तक लोग खुलकर जांच नहीं कराएंगे और सुरक्षित व्यवहार नहीं अपनाएंगे, तब तक संक्रमण की रफ्तार को पूरी तरह नियंत्रित करना मुश्किल होगा।बिहार में बढ़ते एचआईवी मामले एक चेतावनी हैं कि सामूहिक प्रयासों और निरंतर जागरूकता के जरिए ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।






