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आपके प्राइवेट मोमेंट्स देख रहे हैं अजनबी कर्मचारी, नई रिपोर्ट में Meta Ray-Ban पर बड़ा खुलासा!

Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास की प्राइवेसी पर स्वीडिश अखबार की रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। खुलासे के अनुसार, यूजर्स के कपड़े बदलने और पार्टनर के साथ निजी पलों के वीडियो AI ट्रेनिंग के नाम पर इंसानी मॉडरेटर्स देख रहे हैं। जानिए क्या है स्मार्ट ग्लास की जासूसी का पूरा सच।
Smart Glass or Spy: आपके प्राइवेट मोमेंट्स देख रहे हैं अजनबी कर्मचारी, नई रिपोर्ट में Meta Ray-Ban पर बड़ा खुलासा।

Smart Glass or Spy: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट वियरेबल्स की दुनिया में मचे शोर के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने तकनीकी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। Meta और Ray-Ban के जिस स्मार्ट ग्लास को भविष्य की तकनीक बताया जा रहा था, अब वही यूज़र्स की प्राइवेसी के लिए खतरा बनता नजर आ रहा है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इन चश्मों द्वारा रिकॉर्ड किया गया डेटा सीधे तौर पर इंसानी हाथों तक पहुँच रहा है।

Smart Glass or Spy: इंसानी ट्रेनर्स देख रहे हैं आपकी निजी फुटेज

स्वीडन के प्रमुख समाचार पत्र ‘Svenska Dagbladet’ की एक विस्तृत पड़ताल में यह बात सामने आई है कि मेटा के स्मार्ट ग्लास से जो वीडियो और तस्वीरें ली जाती हैं, उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बेहतर बनाने के नाम पर ह्यूमन मॉडरेटर्स को दिखाया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि आपकी रिकॉर्डिंग केवल सर्वर तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के किसी कोने में बैठा कोई व्यक्ति उसे अपनी स्क्रीन पर देख सकता है। यह खुलासा उन लोगों के लिए बड़ा झटका है जो अपनी प्राइवेसी को लेकर जागरूक हैं।

Smart Glass or Spy: अनजाने में रिकॉर्ड हो रहे हैं बेडरूम के दृश्य

इस रिपोर्ट में केन्या की एक कंपनी ‘Sama’ का जिक्र किया गया है जो मेटा के लिए आउटसोर्सिंग का काम करती है। वहां काम करने वाले कुछ सूत्रों ने बेहद डराने वाली जानकारियां साझा की हैं। उनके अनुसार, एआई को ट्रेनिंग देने के दौरान उनके सामने ऐसे वीडियो आते हैं जिनमें लोग अपने घरों के अंदर बेहद निजी पलों में होते हैं। कई बार लोग कपड़े बदलते समय या अपने पार्टनर के साथ संवेदनशील स्थितियों में इन ग्लासेज की जद में आ जाते हैं, जबकि उन्हें लगता है कि कैमरा बंद है या डेटा सुरक्षित है।

AI ट्रेनिंग का अंधेरा सच

तकनीकी रूप से एआई को स्मार्ट बनाने के लिए ‘डेटा लेबलिंग’ का सहारा लिया जाता है। इसमें हजारों कर्मचारी स्क्रीन पर दिखने वाले हर ऑब्जेक्ट की पहचान करते हैं और उस पर मार्क लगाते हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान यूज़र्स का वह डेटा भी इन कर्मचारियों के सामने आ जाता है जिसे कभी रिकॉर्ड करने का इरादा ही नहीं था। यह पूरी प्रक्रिया यह दर्शाती है कि स्मार्ट टेक्नोलॉजी के नाम पर ली जाने वाली फुटेज किस तरह तीसरे पक्ष के हाथों में खेल रही है।

सुरक्षा के दावों पर लगा बड़ा प्रश्नचिह्न

मेटा हमेशा से यह दावा करता आया है कि उसके स्मार्ट ग्लास में रिकॉर्डिंग इंडिकेटर जैसी सुविधाएं प्राइवेसी को सुरक्षित रखती हैं। हालांकि, इस नई रिपोर्ट ने इन दावों की कलई खोल दी है। अगर यूज़र की सबसे निजी जानकारी एआई को ट्रेन करने के नाम पर अजनबियों के पास जा रही है, तो यह डेटा सुरक्षा और नैतिकता का एक बड़ा उल्लंघन है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद तकनीकी कंपनियां अपनी नीतियों में क्या बदलाव करती हैं।

 

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