Gujarat News: गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद के नवरंगपुरा इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय लोगों के होश उड़ा दिए हैं। एक पॉश रिहायशी फ्लैट के भीतर लंबे समय से विदेशी जानवरों के अवैध प्रजनन और तस्करी का काला कारोबार फल-फूल रहा था। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जांच टीम ने वहां छापेमारी की और फ्लैट के अंदर का मंजर देखकर दंग रह गए।
Gujarat News: रिहायशी फ्लैट में मौत का सौदा
हैरानी की बात यह है कि जिस फ्लैट में यह गोरखधंधा चल रहा था, उसके आसपास रहने वाले पड़ोसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। एक छोटे से 10×12 फीट के कमरे के भीतर 50 से अधिक विदेशी प्रजातियों के सांपों को कैद करके रखा गया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह कोई साधारण शौक नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क था जो विदेशी सांपों को पालने, उनका जहर निकालने और उसे ऊंचे दामों पर रेव पार्टियों में सप्लाई करने का काम कर रहा था।
Gujarat News: सांप के जहर से नशे का खौफनाक खेल
पकड़े गए आरोपियों के नेटवर्क के तार अहमदाबाद और गांधीनगर की हाई-प्रोफाइल रेव पार्टियों से जुड़े हुए हैं। पूछताछ और शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन पार्टियों में मनोरंजन के लिए सांप के जहर का इस्तेमाल किया जाता था। नशे के शौकीन लोग सांप के जहर की एक खुराक के लिए 50,000 रुपये तक की भारी भरकम रकम चुकाते थे। नशा करने के लिए लोग सांपों से खुद को कटवाते थे या फिर जहर की कुछ बूंदों को सीधे ब्लड में इंजेक्ट करते थे। अलग-अलग प्रजाति के सांपों से डसवाने के लिए बाकायदा लाखों रुपये का रेट कार्ड तय किया गया था।
सिर्फ सांप ही नहीं, विदेशी परिंदे और बंदर भी बरामद
पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी मणिकनंदन नादर को गिरफ्तार कर लिया है। फ्लैट से केवल सांप ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहद महंगे बिकने वाले अन्य दुर्लभ जानवर भी मिले हैं। रेस्क्यू किए गए जीवों में लाल हाथ वाला छोटा टैमरिन बंदर, अफ्रीकी ग्रे तोते, नीले और सुनहरे मैकाऊ, फारसी बिल्लियां और नीदरलैंड के दुर्लभ बौने खरगोश शामिल हैं। इन सभी जानवरों को बेहद अमानवीय परिस्थितियों में तस्करी के उद्देश्य से वहां रखा गया था।
गंभीर स्वास्थ्य जोखिम और कानूनी शिकंजा
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के जहर का नशे के रूप में इस्तेमाल करना बेहद दुर्लभ और जानलेवा है। यह न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि इंसान के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर इसके घातक परिणाम होते हैं। फिलहाल पुलिस और वन्यजीव विभाग की कई टीमें इस नेटवर्क की गहराई तक जाने की कोशिश कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट के पीछे और कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं।
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