US Trade Action : अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने वैश्विक व्यापार को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। भारत और चीन समेत दुनिया के 16 बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई जांच शुरू की गई है। इस प्रावधान के जरिए अमेरिका उन देशों पर एकतरफा टैरिफ बढ़ा सकता है, जिन्हें वह अपने उद्योगों के लिए नुकसानदायक मानता है। माना जा रहा है कि इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में फिर से तनाव बढ़ सकता है।
दरअसल, कुछ समय पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया था, जिसकी अवधि सीमित है।
US Trade Action
अब प्रशासन ‘सेक्शन 301’ जैसे दूसरे कानूनी विकल्प का सहारा लेकर व्यापारिक दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इससे ट्रेड पार्टनर्स को बातचीत के लिए मजबूर किया जा सकता है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव कार्यालय ने जिन देशों के खिलाफ जांच शुरू की है, उनमें भारत, चीन, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार शामिल हैं। इसके अलावा वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे भी इस सूची में हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं ये देश जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर सस्ते दामों पर सामान अमेरिकी बाजार में तो नहीं उतार रहे।
‘अतिरिक्त उत्पादन’ की जांच
अमेरिका का आरोप है कि कुछ देश अपने उद्योगों को सरकारी मदद देकर जरूरत से ज्यादा सामान बनवा रहे हैं। जब घरेलू बाजार में उसकी खपत नहीं हो पाती, तो वही उत्पाद कम कीमत पर दूसरे देशों के बाजारों में भेज दिए जाते हैं। इससे स्थानीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। अमेरिकी प्रशासन इसी ‘ओवरकैपेसिटी’ या अतिरिक्त उत्पादन के मुद्दे की जांच कर रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह जांच
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, लेकिन व्यापार संतुलन अभी भी भारत के पक्ष में है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका के साथ भारत का गुड्स ट्रेड सरप्लस अभी भी काफी बड़ा है। ऐसे में अगर जांच में भारत की व्यापार नीतियों को अमेरिका अनुचित मानता है तो भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। इससे टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।
जुलाई तक सामने आ सकते हैं बड़े फैसले
इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक समयसीमा भी तय की गई है। अप्रैल तक कंपनियों और आम लोगों से सुझाव लिए जाएंगे और मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई हो सकती है। इसके बाद जुलाई से पहले जांच के नतीजे सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ बढ़ाए गए तो वैश्विक व्यापार पर इसका असर पड़ना तय है और कई देशों को अपनी निर्यात रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
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