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क्या कोई भी आम आदमी लड़ सकता है विधानसभा चुनाव? खर्च जानकर चौंक जाएंगे

Assembly Elections 2026: चुनाव आयोग ने 15 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 824 विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है और राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।

क्या आम नागरिक चुनाव लड़ सकता है?

चुनाव की घोषणा के बाद अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कोई आम नागरिक भी विधानसभा चुनाव लड़ सकता है। भारतीय संविधान और चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार भारत का कोई भी नागरिक विधानसभा चुनाव लड़ सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। इसके अलावा उम्मीदवार का नाम किसी भी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है। साथ ही उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए और किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।

Assembly Elections 2026: किन लोगों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं

कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माना जाता। यदि किसी व्यक्ति को अदालत ने मानसिक रूप से अयोग्य घोषित किया हो या उसे किसी आपराधिक मामले में दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाई गई हो, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है।

नामांकन के समय जमा करनी होती है राशि

विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को निर्धारित समय के भीतर नामांकन पत्र दाखिल करना होता है। इसके साथ ही चुनाव आयोग के पास सुरक्षा जमा राशि भी जमा करनी होती है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह राशि 10 हजार रुपये तय की गई है, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह राशि 5 हजार रुपये रखी गई है।

Assembly Elections 2026: चुनाव प्रचार पर कितना खर्च

चुनाव लड़ने का वास्तविक खर्च इससे कहीं अधिक होता है। चुनाव प्रचार के दौरान रैलियां, जनसभाएं, पोस्टर, प्रचार सामग्री और अन्य गतिविधियों पर काफी खर्च आता है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार अधिकतम 40 लाख रुपये तक खर्च कर सकता है, जबकि छोटे राज्यों में यह सीमा 28 लाख रुपये तय की गई है।

खर्च का हिसाब देना जरूरी

उम्मीदवार को अपने पूरे चुनावी खर्च का विवरण चुनाव आयोग को देना अनिवार्य होता है। यदि कोई उम्मीदवार तय सीमा से अधिक खर्च करता है या खर्च का सही विवरण नहीं देता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। इस तरह जरूरी नियमों और शर्तों का पालन करते हुए कोई भी आम नागरिक विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है।

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