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Navodaya Vidyalaya में EWS आरक्षण पर सवाल, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

MP High Court

देशभर के जवाहर Navodaya Vidyalaya में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को प्रवेश में शामिल न किए जाने का मुद्दा अब न्यायालय तक पहुंच गया है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने इस विषय को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय की इस कार्रवाई के बाद शिक्षा व्यवस्था और आरक्षण नीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

यह मामला जबलपुर की छात्रा नव्या तिवारी की ओर से दायर याचिका के जरिए अदालत के सामने आया। छात्रा के अभिभावक धीरज तिवारी ने याचिका में कहा कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का मूल उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है।

Navodaya Vidyalaya में EWS आरक्षण पर सवाल

वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे यह वर्ग अवसर से वंचित रह जाता है। याचिका में यह भी बताया गया कि नवोदय विद्यालयों में प्रवेश के दौरान कई वर्गों के लिए अलग-अलग आरक्षण और सुविधाएं निर्धारित हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र, बालिकाएं और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था मौजूद है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे समान अवसर की भावना प्रभावित होती है।

संवैधानिक संशोधन का दिया गया हवाला

याचिका में संविधान के 103वें संशोधन का उल्लेख भी किया गया है, जिसके तहत 2019 में अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया था। इस प्रावधान के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत तक आरक्षण का रास्ता बनाया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब यह संवैधानिक व्यवस्था लागू है, तो नवोदय विद्यालयों की प्रवेश नीति में इसे शामिल न करना नियमों की अनदेखी माना जा सकता है। अदालत में पेश दलीलों के दौरान यह भी मुद्दा उठाया गया कि शिक्षा मंत्रालय के अधीन चलने वाले केंद्रीय विद्यालयों में EWS वर्ग को प्रवेश का लाभ दिया जाता है।

उसी मंत्रालय के अंतर्गत संचालित नवोदय विद्यालयों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने इसे नीतिगत असंगति बताते हुए कहा कि समान संस्थानों के लिए अलग-अलग नियम होना उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया गया जिक्र

याचिका में हाल ही में आए एक न्यायिक फैसले का हवाला भी दिया गया, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को अवसर न मिलने के मुद्दे को गंभीर बताया गया था। वकील का कहना है कि देशभर के नवोदय विद्यालयों में लाखों छात्र पढ़ रहे हैं और यदि EWS आरक्षण लागू नहीं होता, तो बड़ी संख्या में योग्य छात्र शिक्षा के अवसर से दूर रह जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को उच्चतम न्यायालय तक ले जाया जा सकता है।

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