मध्य-पूर्व ईरान में छिड़े युद्ध (NATO) को 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। शुरुआत में अमेरिका और इजराइल को लगा था कि ईरान के कई बड़े सैन्य अधिकारियों के मारे जाने के बाद जंग जल्दी खत्म हो जाएगी, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। ईरान ने जवाबी रणनीति के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति को प्रभावित कर दिया है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। युद्ध के लंबे खिंचने से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक मदद देने की अपील की थी, ताकि इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा सुरक्षित बनाया जा सके। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कई देशों ने साफ इनकार कर दिया है।
NATO ईरान के साथ जंग में अकेले पड़ गए ट्रंप
यूरोपीय देशों का कहना है कि वे सीधे सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं बनना चाहते। उनका मानना है कि यह संघर्ष अमेरिका और ईरान के बीच का है, इसलिए इसमें शामिल होना उनके लिए उचित नहीं होगा। इस फैसले ने ट्रंप की रणनीति को बड़ा झटका दिया है। जर्मनी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस संकट में किसी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा। जर्मन नेतृत्व का कहना है कि युद्ध से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा और यह यूरोप की लड़ाई भी नहीं है। इसी तरह ब्रिटेन ने भी संकेत दिया है कि वह इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने से बचना चाहता है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना जरूरी है, लेकिन इसके लिए जल्दबाजी में कोई सैन्य कदम उठाना सही नहीं होगा।
यूरोप का कूटनीति पर जोर
यूरोपीय देशों का रुख साफ है कि वे इस संकट का हल बातचीत के जरिए निकालना चाहते हैं। उनका मानना है कि युद्ध का विस्तार पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। इटली सहित कई देशों ने कहा है कि मौजूदा नौसैनिक मिशन समुद्री सुरक्षा और समुद्री डकैती रोकने के लिए हैं, उन्हें युद्ध में बदलना ठीक नहीं होगा। फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है।
ईरान की सख्त चेतावनी
दूसरी ओर इजराइल ने ईरान के कई शहरों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले तेज कर दिए हैं। इजराइली सेना का कहना है कि वह ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए अभियान चला रही है। ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना सीधे युद्ध में उतरी तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते हमलों से यह संघर्ष और लंबा खिंचने की आशंका जताई जा रही है।
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