Parliament News: लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद के मुद्दे पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपने राजनीतिक जीवन में कई बार नक्सलियों के हमदर्दों के साथ देखे गए हैं।
‘भारत जोड़ो यात्रा’ का किया जिक्र
गृह मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में कई ऐसे संगठन शामिल हुए, जिनका संबंध नक्सल फ्रंट से बताया जाता है। शाह ने दावा किया कि इसके उनके पास रिकॉर्ड मौजूद हैं।
Parliament News: पुराने घटनाक्रमों का भी उल्लेख
अमित शाह ने सदन में कई पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि 2010 में ओडिशा में राहुल गांधी ने लाडो शिकोका के साथ मंच साझा किया था, जहां भड़काऊ भाषण दिया गया। इसके अलावा 2018 में हैदराबाद में गुमड़ी विट्ठल राव उर्फ गद्दार से मुलाकात का भी जिक्र किया।
उन्होंने यह भी कहा कि मई 2025 में एक ‘को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ पीस’ से मुलाकात हुई थी। साथ ही, नक्सली कमांडर हिडमा के मारे जाने के बाद लगाए गए नारों और उससे जुड़े वीडियो को लेकर भी उन्होंने राहुल गांधी पर सवाल उठाए।
‘अर्बन नक्सल’ पर भी साधा निशाना
गृह मंत्री ने तथाकथित ‘अर्बन नक्सल’ समर्थकों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल हथियार उठाने वालों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, जबकि आम नागरिकों की पीड़ा को नजरअंदाज करते हैं। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में प्रकाशित लेखों में सरकार से माओवादियों से बातचीत करने की बात कही जा रही है, जो चिंताजनक है।
Parliament News: कम्युनिस्ट विचारधारा पर भी सवाल
अमित शाह ने कम्युनिस्ट विचारधारा पर भी हमला करते हुए कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना विदेशी प्रभाव में हुई थी। उन्होंने कहा कि 1964 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का गठन हुआ और 1969 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) बनी, जिसका उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र का विरोध और सशस्त्र क्रांति था।
नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता
गृह मंत्री ने दोहराया कि केंद्र सरकार देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों और विकास योजनाओं के जरिए सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है।
Parliament News: सियासी बयानबाजी तेज
अमित शाह के इस बयान के बाद सियासी माहौल और गरमा गया है। विपक्ष की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है।
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