US Israel Vs Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर कई दावे और चेतावनियां दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में अमेरिका को बढ़त मिली है। ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि आने वाले दो से तीन हफ्तों के भीतर अमेरिका ईरान पर और बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। उनके अनुसार युद्ध के दौरान ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है और उसकी नौसेना भी कमजोर हो गई है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत पहले की तुलना में काफी कम हो चुकी है और इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य अब लगभग पूरा होने वाला है।

समझौता नहीं हुआ तो “स्टोन एज” में भेजने की चेतावनी
अपने भाषण में ट्रम्प ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को “स्टोन एज” यानी पाषाण युग जैसी स्थिति में पहुंचा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता में बदलाव हुआ है और अब वहां की नई लीडरशिप पहले की तुलना में कम कट्टर मानी जा रही है।
US Israel Vs Iran War: 19 मिनट के भाषण में कोई बड़ा नया ऐलान नहीं
ट्रम्प का यह संबोधन करीब 19 मिनट तक चला, लेकिन इसमें कोई बड़ा नया ऐलान नहीं किया गया। उन्होंने वही बातें दोहराईं जो वे पिछले कुछ समय से लगातार कहते आ रहे हैं। अपने भाषण के दौरान उन्होंने उन अमेरिकी नागरिकों को भी जवाब देने की कोशिश की जो युद्ध की लागत और इसके लंबे समय तक चलने को लेकर चिंतित हैं। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका पहले भी लंबे युद्धों का सामना कर चुका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इराक युद्ध लगभग 8 साल चला था और वियतनाम युद्ध करीब 19 साल तक चला था, जबकि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष अभी सिर्फ दूसरे महीने में पहुंचा है।
बातचीत की मांग और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बयान
अपने संबोधन में ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत करनी चाहिए। हालांकि इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें किसी समझौते की जरूरत नहीं है। इसी तरह उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर कहा कि इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अन्य देशों को उठानी चाहिए। लेकिन एक दिन पहले उन्होंने यह भी कहा था कि होर्मुज जलमार्ग खुले बिना किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं होगा।

28 फरवरी को शुरू हुआ था अमेरिका-इजराइल का हमला
दरअसल अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था। इसके कुछ समय बाद ही ट्रम्प ने लगभग आठ मिनट का एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने इस सैन्य अभियान के मुख्य लक्ष्य बताए थे। उनका कहना था कि इस युद्ध का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा करना और ईरान से पैदा होने वाले खतरों को खत्म करना है। अब एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद यह देखा जा रहा है कि उन लक्ष्यों में अमेरिका को कितनी सफलता मिली है और कौन से लक्ष्य अभी भी अधूरे हैं।
US Israel Vs Iran War: मिसाइल और ड्रोन क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं
युद्ध के दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई मिसाइल ठिकानों और उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट किया है। इसके बावजूद ईरान अब भी मिसाइल और ड्रोन हमले करने में सक्षम है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी यह क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और उसके कई जहाज नष्ट कर दिए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह कहना अभी मुश्किल है कि ईरानी नौसेना पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
मिलिशिया अब भी सक्रिय
अमेरिका का एक और लक्ष्य ईरान समर्थित प्रॉक्सी मिलिशिया समूहों को कमजोर करना था। लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि इराक और लेबनान में सक्रिय ये मिलिशिया समूह अभी भी हमले कर रहे हैं, जिससे यह लक्ष्य भी पूरी तरह हासिल नहीं माना जा सकता।
परमाणु कार्यक्रम को रोकना भी अमेरिका का एक बड़ा उद्देश्य था। अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास अब भी उच्च स्तर का यूरेनियम मौजूद है। इसका मतलब यह है कि परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
US Israel Vs Iran War: सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य भी अधूरा
ट्रम्प ने शुरुआत में ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात भी कही थी, लेकिन फिलहाल वहां का मौजूदा शासन कायम है और नई लीडरशिप भी सख्त रुख अपनाए हुए मानी जा रही है।
ट्रम्प के इस बयान का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला। जब उन्होंने कहा कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों तक ईरान पर हमले जारी रखेगा, तो इससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई और एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स करीब 0.53 प्रतिशत गिर गया, जबकि CSI300 इंडेक्स में लगभग 0.74 प्रतिशत की गिरावट आई। इसी तरह हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 1.1 प्रतिशत नीचे आ गया, जबकि टेक सेक्टर में ज्यादा दबाव देखने को मिला और HSTECH इंडेक्स करीब 2.2 प्रतिशत तक गिर गया।
युद्ध के लंबे समय तक चलने की आशंका ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है। इसका असर केवल चीन और हांगकांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और युद्ध के बढ़ते खतरे ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।

US Israel Vs Iran War: ईरान ने इजराइल पर दागीं मिसाइलें
इसी दौरान ईरान ने इजराइल पर एक बार फिर मिसाइल हमला किया। इस हमले के बाद उत्तरी इजराइल के कई इलाकों में सायरन बजने लगे। इजराइली सेना ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान की ओर से मिसाइलें दागी गई हैं और संभावित खतरे को देखते हुए एयर डिफेंस सिस्टम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया है।
दूसरी ओर लेबनान के हथियारबंद संगठन हिजबुल्लाह ने भी इजराइल पर हमला किया है। संगठन ने रॉकेट और ड्रोन के जरिए उत्तरी इलाकों में तैनात इजराइली सैनिकों को निशाना बनाया। हिजबुल्लाह का दावा है कि उसके लड़ाकों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कई रॉकेट दागे और ड्रोन के जरिए भी अलग-अलग ठिकानों पर हमले किए।
ट्रम्प के भाषण के बाद जापान का बाजार भी गिरा
ट्रम्प के भाषण का असर जापान के शेयर बाजार पर भी पड़ा। शुरुआत में निक्केई इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत तक ऊपर गया था, लेकिन बाद में यह गिरकर 1.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 52,867 पर आ गया। इसी तरह टॉपिक्स इंडेक्स भी अपनी शुरुआती बढ़त खोकर लगभग 1 प्रतिशत नीचे आ गया। दरअसल निवेशकों को उम्मीद थी कि ट्रम्प अपने भाषण में युद्ध खत्म होने का कोई संकेत देंगे, लेकिन ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला।
इस सप्ताह बाजार में तेजी का माहौल बन रहा था, खासकर मार्च महीने के कमजोर प्रदर्शन के बाद निवेशक खरीदारी कर रहे थे। लेकिन ट्रम्प के बयान के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया।
US Israel Vs Iran War: ट्रम्प के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
ट्रम्प के संबोधन का असर तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। उनके बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। ट्रम्प ने कहा कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका ईरान पर हमले और तेज कर सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर ईरान के बिजली संयंत्रों और तेल कारोबार को भी निशाना बनाया जा सकता है।
बाजार को उम्मीद थी कि ट्रम्प के भाषण से तनाव कम होने का संकेत मिलेगा, लेकिन इसके उलट उन्होंने मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर देशों से कहा कि वे होर्मुज संकट को खुद संभालें और फिलहाल अमेरिकी तेल खरीदें।
इस बयान के बाद अमेरिका का बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल, जो भाषण से पहले लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल था, वह रात करीब 10 बजे (अमेरिकी समय) तक बढ़कर लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत भी करीब 100 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तेल की कीमतों में इस तेजी और युद्ध के बढ़ते खतरे ने वैश्विक बाजारों में चिंता को और बढ़ा दिया है।
नागरिकों से तुरंत इराक छोड़ने को कहा
अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए इराक में बड़ा सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने चेतावनी दी है कि आने वाले 24 से 48 घंटों के भीतर राजधानी बगदाद के केंद्रीय इलाके में हमले हो सकते हैं। दूतावास के अनुसार इन संभावित हमलों के पीछे ईरान से जुड़े मिलिशिया समूह हो सकते हैं।
अमेरिकी दूतावास ने अपने अलर्ट में कहा है कि ईरान समर्थित मिलिशिया संगठन बगदाद के सेंट्रल क्षेत्र को निशाना बना सकते हैं। इस वजह से सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति को बेहद संवेदनशील माना है और नागरिकों को सावधान रहने के लिए कहा गया है।

अमेरिकी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह
दूतावास ने खास तौर पर अपने नागरिकों से कहा है कि वे तुरंत इराक छोड़ने की तैयारी करें और जितनी जल्दी हो सके वहां से निकल जाएं। दूतावास का कहना है कि सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है और ऐसे में वहां रहना जोखिम भरा हो सकता है।
यह चेतावनी ऐसे समय में दी गई है जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब इराक तक असर दिखाने लगा है। ईरान समर्थित मिलिशिया संगठन पहले भी इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, दूतावास और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर हमले कर चुके हैं। अब एक बार फिर ऐसे हमलों की आशंका बढ़ने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
ट्रम्प के “स्टोन एज” बयान पर अमेरिकी सांसद की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिका की सांसद यासमीन अंसारी ने ईरान को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान की तीखी आलोचना की है। ट्रम्प ने अपने भाषण में कहा था कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान को फिर से “स्टोन एज” यानी पाषाण युग जैसी स्थिति में पहुंचा सकता है।
ट्रम्प के इस बयान के बाद यासमीन अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि ट्रम्प जिस देश के बारे में ऐसी बात कह रहे हैं, वहां लगभग 9 करोड़ लोग रहते हैं।
अंसारी ने अपने पोस्ट में कहा कि इतने बड़े देश के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना घृणित, डर पैदा करने वाला और पूरी तरह गलत है। उनके अनुसार ऐसे बयान हालात को और ज्यादा तनावपूर्ण बना सकते हैं।

एरिजोना से पहली डेमोक्रेटिक सांसद
यासमीन अंसारी अमेरिका के एरिजोना राज्य से चुनी गई पहली डेमोक्रेटिक सांसद हैं। अंसारी की पारिवारिक जड़ें ईरान से जुड़ी हुई हैं, इसलिए ईरान से संबंधित मुद्दों पर उनकी प्रतिक्रिया खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इस बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है।
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