Who Is Shahzad Bhatti: गुजरात के बनासकांठा जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए स्लीपर सेल से जुड़े आरोपी बिक्रमजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी केवल एक अपराधी की नहीं, बल्कि पाकिस्तान से संचालित एक बड़े ‘हाइब्रिड टेरर’ नेटवर्क के खुलासे के तौर पर देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, यह नेटवर्क शहजाद भट्टी द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां आईएसआई का नया चेहरा मान रही हैं। बताया जा रहा है कि भट्टी विदेश में रहकर भारत में गैंगस्टरों और युवाओं को जोड़कर आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिला रहा है।
हाइब्रिड टेरर मॉडल से फैला जाल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, भट्टी पारंपरिक आतंकी हमलों की बजाय ‘हाइब्रिड टेरर’ रणनीति अपनाता है। इसके तहत वह सोशल मीडिया के जरिए छोटे अपराधों में शामिल युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करता है और उन्हें पुलिस स्टेशन, खुफिया विभाग व सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने के लिए उकसाता है।
ड्रोन और तस्करी के जरिए हथियार और विस्फोटक भारत तक पहुंचाए जाते हैं, जिन्हें स्लीपर सेल के जरिए इस्तेमाल किया जाता है।
Who Is Shahzad Bhatti: गुजरात से पंजाब तक फैला नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपी बिक्रमजीत सिंह पंजाब पुलिस को पहले से ही ग्रेनेड तस्करी के मामले में वांटेड था और गुजरात के दीसा में पहचान छिपाकर रह रहा था। जांच में सामने आया है कि वह भट्टी के संपर्क में था और नए युवाओं की भर्ती कर रहा था।
पिछले कुछ महीनों में दिल्ली, अंबाला और अमृतसर से भी इस नेटवर्क से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिससे स्पष्ट है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय है।
Who Is Shahzad Bhatti: कई हमलों का मास्टरमाइंड
जांच में यह भी सामने आया है कि भट्टी नवंबर 2025 में गुरदासपुर में हुए ग्रेनेड हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था। इसके अलावा, जालंधर और सिरसा में भी हमलों की साजिश और दिल्ली-अंबाला में सरकारी ठिकानों की रेकी जैसे मामलों में उसका नाम सामने आया है।
गैंगस्टर कनेक्शन और दुश्मनी
भट्टी का नाम भारतीय गैंगस्टर Lawrence Bishnoi से भी जुड़ा रहा है। पहले दोनों के बीच तालमेल की खबरें थीं, लेकिन अब दोनों एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन चुके हैं। हाल ही में विदेश में भट्टी पर हुए हमले की जिम्मेदारी भी बिश्नोई गैंग ने ली थी।
आईएसआई की नई रणनीति
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आईएसआई अब पुराने चेहरों की बजाय नए नामों का इस्तेमाल कर रही है, ताकि आतंकी घटनाओं को गैंगवार का रूप देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव से बचा जा सके। इस रणनीति का मकसद भारत में अस्थिरता फैलाना और सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती देना है।
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