Iran vs Us war: ट्रंप ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य हमले को आखिरी क्षणों में टाल दिया। तय समयसीमा से महज 90 मिनट पहले लिया गया यह फैसला वैश्विक स्तर पर तनाव कम करने वाला माना जा रहा है।
शर्त के साथ 2 हफ्ते का विराम
ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका दो हफ्तों तक हमला नहीं करेगा, लेकिन इसके लिए शर्त रखी गई है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हो। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।
Iran vs Us war: पाकिस्तान की मध्यस्थता से बनी बात
बताया जा रहा है कि इस फैसले से पहले पर्दे के पीछे पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत हुई। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि इस पहल से दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम की स्थिति बन पाई है।
‘ज्यादातर मुद्दों पर सहमति’ का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने कई सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है और ईरान के साथ शांति समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला है, जिनमें से अधिकांश पर सहमति बन चुकी है।
Iran vs Us war: ईरान ने भी दिए नरमी के संकेत
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी संकेत दिए हैं कि यदि हमले रोके जाते हैं, तो ईरान अपनी सैन्य कार्रवाई रोक सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी समन्वय के साथ होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही बहाल की जा सकती है।
तनाव अब भी बरकरार
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, इजरायल ने भी इस अस्थायी विराम पर सहमति जताई है, हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। खाड़ी क्षेत्र में कुछ जगहों पर मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
Iran vs Us war: वैश्विक तेल बाजार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे संकट का केंद्र बना हुआ है। इसके बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतों में उछाल आया। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे जल्द खोलने की मांग तेज हो गई थी।
भारत पर भी पड़ेगा असर
इस तनाव का असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जो खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात पर निर्भर हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट का खुलना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Iran vs Us war: आगे क्या?
फिलहाल यह दो हफ्तों का समय बातचीत के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि प्रतिबंधों, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय नियंत्रण जैसे मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह अस्थायी विराम स्थायी शांति में बदल पाता है या नहीं।
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