West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की योजना बनाई है। चुनाव के दौरान किसी भी तरह की हिंसा या गड़बड़ी को रोकने के लिए इस बार करीब तीन हजार अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया जाएगा। इन बलों को उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से बुलाया जाएगा, जो पहले से मौजूद केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के साथ मिलकर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे।
चुनाव आयोग ने यह फैसला खास तौर पर उन क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए लिया है, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना गया है। इन इलाकों में मतदान के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।

13 अप्रैल से शुरू होगी अतिरिक्त फोर्स की तैनाती
चुनाव ड्यूटी के लिए आने वाले अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती 13 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से शुरू हो जाएगी। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग राज्यों से आने वाली फोर्स धीरे-धीरे पश्चिम बंगाल पहुंचकर चुनावी ड्यूटी संभालेगी।
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि आयोग का मुख्य लक्ष्य राज्य में निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और हिंसा-मुक्त मतदान सुनिश्चित करना है, इसलिए सुरक्षा के हर पहलू पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
CAPF की 2,400 कंपनियां रहेंगी तैनात
पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान सुरक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे राज्य में CAPF की लगभग 2,400 कंपनियों की तैनाती की योजना पहले ही तैयार कर ली गई है।
23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान के दौरान इन सुरक्षा बलों को मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर कड़ी निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
West Bengal Election: पूर्व पुलिस कमिश्नर की अर्जी आयोग ने ठुकराई
इसी बीच चुनाव आयोग ने कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार की एक याचिका भी खारिज कर दी है। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए तमिलनाडु में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में दी गई नई जिम्मेदारी से मुक्त करने की मांग की थी।हालांकि आयोग ने उनकी इस मांग को स्वीकार नहीं किया और उन्हें सोमवार तक अपनी ड्यूटी संभालने का निर्देश दिया है।

तमिलनाडु के अहम क्षेत्रों की जिम्मेदारी
सुप्रतिम सरकार को तमिलनाडु के तिरुनेलवेली, अंबासमुद्रम, पलायमकोट्टई, नंगुनेरी और राधापुरम जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों के लिए पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें इस जिम्मेदारी से कोई छूट नहीं दी जाएगी और उन्हें तुरंत अपनी ड्यूटी जॉइन करनी होगी।
पश्चिम बंगाल में कब होंगे चुनाव?
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित होगा। वहीं, चुनाव के नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी।
इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई बार निर्वाचन आयोग पर आरोप लगा चुकी हैं कि वह भाजपा के प्रभाव में काम कर रहा है। इसके अलावा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर तृणमूल कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद भी बढ़ गया है।चुनाव के मद्देनजर राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है, ताकि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सके।








