AI Flood control: गोरखपुर अब सिर्फ पूर्वांचल का एक बड़ा शहर नहीं रहा, बल्कि तकनीक की मदद से आपदा प्रबंधन का देशभर में मिसाल बन चुका है। जहां हर साल मानसून में जलभराव लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनता था, वहीं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम ने इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर दिया है। नगर निगम द्वारा विकसित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम ने शहर में जलभराव की स्थिति को 65 प्रतिशत तक कम कर दिया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
AI और IoT का कमाल, पहले ही मिल जाती है चेतावनी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत तैयार इस सिस्टम में AI, IoT, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्विन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब शहर को बारिश और बाढ़ की चेतावनी 24 घंटे पहले ही मिल जाती है। इतना ही नहीं, यह पूर्वानुमान 80 प्रतिशत से ज्यादा सटीक साबित हो रहा है, जिससे प्रशासन को पहले से तैयारी का मौका मिल जाता है।
AI Flood control: देश का पहला AI अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल बना गोरखपुर में
गोरखपुर में देश का पहला AI आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (UFMC) स्थापित किया गया है, जिसकी तारीफ प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग तक कर चुके हैं। 23 जुलाई 2025 को शुरू हुए इस सेंटर ने कुछ ही महीनों में शानदार परिणाम दिए हैं। ट्रायल के दौरान आई 250 से अधिक शिकायतों में से 70 प्रतिशत का समाधान कुछ ही घंटों में कर दिया गया, जो पहले घंटों नहीं बल्कि दिनों का काम हुआ करता था।
AI Flood control: सेंसर और ऑटोमेशन से चलता है पूरा सिस्टम
इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ है स्मार्ट सेंसर और ऑटोमेटेड पंपिंग सिस्टम। शहर के नालों और जलभराव वाले इलाकों में 110 से अधिक वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए हैं, जो हर 2 से 15 मिनट में डेटा भेजते हैं। जैसे ही जलस्तर 80 प्रतिशत के करीब पहुंचता है, अधिकारियों को तुरंत अलर्ट मिल जाता है। वहीं, पंपिंग स्टेशनों पर पानी 60 प्रतिशत पहुंचते ही पंप अपने आप चालू हो जाते हैं, जिससे पानी जमा होने की समस्या तुरंत कम हो जाती है।
हर 15 मिनट में अपडेट, कंट्रोल रूम से होती है निगरानी
नगर निगम ने शहर में ऑटोमैटिक रेन गेज लगाए हैं, जो हर 15 मिनट में बारिश का डेटा देते हैं। इसके साथ ही 24×7 इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से पूरे शहर की निगरानी की जाती है। यहां से यह तय किया जाता है कि किस इलाके में पंप चालू करना है, कहां सक्शन मशीन भेजनी है और किन जगहों पर ज्यादा खतरा है।
AI Flood control: अब शिकायत पर घंटों नहीं, मिनटों में कार्रवाई
पहले जहां जलभराव की शिकायतों को सुलझाने में 10 से 12 घंटे लग जाते थे, वहीं अब यह समय घटकर 1 से 2 घंटे से भी कम हो गया है। कई संवेदनशील इलाकों में तो इस बार जलभराव की स्थिति ही नहीं बनी, जो इस सिस्टम की सफलता को साफ दिखाता है।
पंप फेल होने की समस्या में आई भारी गिरावट
इस नई तकनीक का एक बड़ा फायदा यह भी हुआ है कि पंप बंद होने की घटनाएं 60 प्रतिशत तक कम हो गई हैं। अब पंप पूरी तरह ऑटोमैटिक हैं और उनके रखरखाव से जुड़ी जानकारी भी समय रहते मिल जाती है। इससे सिस्टम पहले से ज्यादा भरोसेमंद और प्रभावी बन गया है।
AI Flood control: गोरखपुर मॉडल बना देश के लिए उदाहरण
नीति आयोग ने भी माना है कि गोरखपुर का यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए प्रेरणा बन सकता है। यह सिस्टम सिर्फ समस्या आने के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से तैयारी करने वाला एक प्रैक्टिव मॉडल है, जो भविष्य में जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है।गोरखपुर ने यह साबित कर दिया है कि अगर तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए, तो बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है। अब यह शहर न केवल बाढ़ से लड़ रहा है, बल्कि स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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