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Iran War: बदलते वैश्विक हालात पर भारत की पैनी नजर, गल्फ देशों से संपर्क तेज

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New Delhi: Ministry of External Affairs (MEA) Spokesperson and Additional Secretary Randhir Jaiswal addresses an inter-ministerial briefing on recent developments in West Asia at the National Media Centre in New Delhi on Wednesday, April 8, 2026. (Photo: IANS/Prem Nath Pandey)

Iran War: पश्चिम एशिया के पल-पल बदलते हालात पर भारत पैनी नजर बनाए हुए है और खाड़ी देशों के साथ लगातार संपर्क साधा जा रहा है। गुरुवार को पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने केंद्र सरकार की तैयारियों और रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और तैयारियां

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बदलते घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत स्थिति की करीब से निगरानी कर रहा है और क्षेत्र के देशों के साथ सक्रिय संपर्क में है। इसी क्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर 11 से 12 अप्रैल 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात का दौरा करेंगे, जहां वे द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

Iran War: भारत-यूएई संबंधों की मजबूती

उन्होंने बताया कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच विकसित हो रही व्यापक रणनीतिक साझेदारी न केवल आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इस साझेदारी के माध्यम से दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

इस बीच खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी भारत की उच्चस्तरीय वार्ता जारी है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 और 10 अप्रैल 2026 को कतर के दौरे पर हैं। यह यात्रा ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

दवा आपूर्ति और कीमतों की स्थिति

फार्मास्यूटिकल्स विभाग के संयुक्त सचिव सत्यप्रकाश टी. एल. ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कई वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हुई थीं, लेकिन दवाओं की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है। एलपीजी और एचएसडी की आपूर्ति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और फिलहाल किसी प्रकार की बाधा नहीं है। सरकार उद्योग के साथ समन्वय बनाकर लगातार प्रयास कर रही है, ताकि दवा उत्पादन और आवश्यक आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।