Telangana news: तेलंगाना में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित CPI (माओवादी) संगठन को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 के अंतिम कमांडर सोडी केशालू उर्फ सोडी केशा ने अपने 42 साथियों के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस दौरान माओवादियों ने भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और करीब 800 ग्राम सोना भी सौंपा।
कौन है सोडी केशालू?
47 वर्षीय सोडी केशालू माओवादी संगठन का बड़ा नाम माना जाता था। वह तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय नेटवर्क का प्रमुख चेहरा था और उसके ऊपर करीब 20 लाख रुपये का इनाम भी घोषित था। संगठन में उसे दूसरे सबसे बड़े कमांडर के रूप में देखा जाता था। सोडी केशालू ने 1995 में माओवादी आंदोलन में कदम रखा था और 2001 में वह आधिकारिक रूप से CPI (माओवादी) का हिस्सा बना। इसके बाद करीब तीन दशकों तक वह अलग-अलग इलाकों में सक्रिय रहा। साल 2023 में वह बटालियन नंबर-1 का कमांडर बना था।
Telangana news: वरिष्ठ कैडरों ने भी डाले हथियार
इस सरेंडर में सिर्फ सोडी केशालू ही नहीं, बल्कि कई बड़े नेता और कैडर भी शामिल रहे। इनमें डिविजनल कमेटी सदस्य, एरिया कमेटी लीडर और प्लाटून कमांडर जैसे पदों पर काम करने वाले लोग शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में मादवी माड़ा, पुनेम सुक्कू, हेमला लाची और सोडी भीमा जैसे सक्रिय माओवादी भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, ये सभी संगठन के अंदर काफी प्रभावशाली माने जाते थे।
Telangana news: मेडिकल और सप्लाई नेटवर्क भी खत्म
पुलिस ने बताया कि सरेंडर करने वालों में एक प्रशिक्षित माओवादी डॉक्टर भी शामिल है। इससे साफ है कि अब सिर्फ हथियारबंद ढांचा ही नहीं, बल्कि संगठन का मेडिकल और लॉजिस्टिक नेटवर्क भी पूरी तरह टूट चुका है। सरेंडर के दौरान कुल 36 हथियार पुलिस को सौंपे गए। इनमें AK सीरीज राइफल, SLR, INSAS, ग्रेनेड लॉन्चर, पिस्टल और रिवॉल्वर शामिल हैं। इसके साथ ही 800 ग्राम सोना भी मिला, जिसे संगठन का इमरजेंसी फंड माना जा रहा है।
तेलंगाना में माओवादियों का अंत करीब?
Telangana news: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रहे सरेंडर के बाद अब तेलंगाना में माओवादियों का नेटवर्क लगभग खत्म हो चुका है। उनका दावा है कि राज्य में CPI (माओवादी) की पकड़ अब बेहद कमजोर पड़ गई है। इस साल तेलंगाना में कई बड़े आत्मसमर्पण हुए हैं। जनवरी में बादिसे देवा, फरवरी में थिप्पिरी तिरुपति और मार्च में 130 माओवादियों ने हथियार डाले थे। इससे साफ है कि माओवादी संगठन लगातार कमजोर हो रहा है।
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