Jharkhand: झारखंड के बोकारो से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने अपनी ही प्रेमिका को जंगल में ले जाकर बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी ने युवती पर करीब 100 बार चाकू से वार किए और फिर शव को जंगल में फेंक दिया। इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाली बात पुलिस की भूमिका रही, जिसने पीड़िता की मां की शिकायत को लगातार नजरअंदाज किया। पीड़िता की मां कई बार थाने पहुंची, लेकिन हर बार उसे टाल दिया गया। आखिरकार थक-हारकर उसने सीनियर अधिकारियों से गुहार लगाई और जब वहां भी सुनवाई नहीं हुई तो झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश के बाद जब मामले की गंभीरता से जांच हुई तो पुलिस की लापरवाही और आरोपी से सांठगांठ का बड़ा खुलासा हुआ।
एक साथ 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड
जांच में दोषी पाए जाने के बाद बोकारो के पिण्ड्राजोरा थाने के पूरे 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ सस्पेंड कर दिया गया। इनमें 10 सब-इंस्पेक्टर, 5 एएसआई, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं। झारखंड के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी एक थाने के सभी पुलिसकर्मियों पर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है। एसपी ने साफ कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो इन पुलिसकर्मियों को सिर्फ सस्पेंड ही नहीं, बल्कि बर्खास्त भी किया जा सकता है।
Jharkhand: 8 महीने बाद मिला पुष्पा का कंकाल
पुष्पा कुमारी महतो करीब 8 महीने पहले 24 जुलाई 2025 को लापता हुई थी। उसकी मां ने अपहरण की शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने 10 दिन तक मामला दर्ज ही नहीं किया। बाद में एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन जांच में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब दूसरी स्पेशल जांच टीम बनाई गई, तो आरोपी को गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही पर जंगल से मृतका के कंकाल की 19 हड्डियां बरामद की गईं। साथ ही हत्या में इस्तेमाल चाकू, कपड़े और मोबाइल भी जब्त किया गया।
Jharkhand: पुलिस पर गंभीर आरोप
जांच में यह सामने आया कि कुछ पुलिसकर्मी जानबूझकर केस को कमजोर कर रहे थे ताकि आरोपी को बचाया जा सके। उन पर आरोप है कि उन्होंने आरोपी के साथ मिलकर पार्टियां कीं और मामले को दबाने के लिए पैसों का लेन-देन भी किया। इतना ही नहीं, थाने की गोपनीय जानकारी भी लीक की गई, जिससे जांच प्रभावित हुई। पहली एसआईटी टीम पर भी अपराधियों को बचाने की कोशिश करने के आरोप लगे हैं।
मां शुरू से पड़ोसी पर लगा रही थी आरोप
Jharkhand: पीड़िता की मां शुरुआत से ही अपने पड़ोसी युवक पर शक जता रही थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अगर पुलिस ने शुरुआत में ही गंभीरता दिखाई होती, तो शायद मामला इतना लंबा न खिंचता और पीड़िता को न्याय के लिए हाईकोर्ट का सहारा न लेना पड़ता। एसपी के मुताबिक, युवती की हत्या उसी दिन कर दी गई थी, जब वह घर से ग्रेजुएशन का फॉर्म भरने निकली थी। आरोपी उसे बहला-फुसलाकर जंगल में ले गया और वहां चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी।
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