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पाकिस्तान में US-ईरान वार्ता पर सस्पेंस: अमेरिका तैयार, ईरान ने सीधे बातचीत से किया इनकार

US Iran Talks:
US Iran Talks:

US Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को भी पाकिस्तान भेजा है।

सीधी बातचीत पर मतभेद

व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधे शांति वार्ता करेगा।हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई बैठक तय नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी बात सीधे नहीं बल्कि पाकिस्तान के जरिए पहुंचाएगा।

US Iran Talks: पहला दौर रहा असफल

पाकिस्तान की मध्यस्थता में 11-12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहली वार्ता करीब 21 घंटे तक चली, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका। इस बातचीत में सबसे बड़े विवाद के मुद्दे होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहे। अमेरिका चाहता है कि होर्मुज से गुजरने वाला समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला और सुरक्षित रहे, ताकि वैश्विक तेल सप्लाई बाधित न हो।

वहीं, ईरान इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक ताकत मानते हुए बातचीत में दबाव बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की मांग करता है, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए जरूरी बताते हुए किसी भी तरह की पाबंदी से इनकार करता है।

US Iran Talks: पाकिस्तान की भूमिका अहम

इस पूरे घटनाक्रम में शहबाज शरीफ की अगुवाई में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। शनिवार को इस्लामाबाद में अराघची और पाकिस्तानी नेतृत्व के बीच बैठक हुई, जिसमें विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी मौजूद रहे।

क्षेत्रीय तनाव जारी

ईरान में सुरक्षा एजेंसियों ने करीब 240 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि लेबनान में इजराइली हमलों का सिलसिला जारी है। इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिल रहा है। इस बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है और कीमतों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है।

आगे क्या?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो एक अस्थायी समझौता (MoU) हो सकता है, जिससे सीजफायर को बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।

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