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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर हस्ताक्षर पर पीएम लक्सन बोले – खुलने वाला है नया आर्थिक अध्याय?

India–New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सोमवार को हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस मौके से पहले न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे “दशकों में एक बार होने वाला” ऐतिहासिक समझौता बताया है।

‘जो दशकों से नहीं हुआ, वह आज होगा’

क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वर्षों तक इस डील को असंभव माना जाता रहा, लेकिन अब यह वास्तविकता बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में ही इस दिशा में सहमति बनी थी।

India–New Zealand FTA: भारत के विशाल बाजार तक पहुंच

लक्सन के अनुसार, यह समझौता न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब की आबादी वाले भारतीय बाजार तक अभूतपूर्व पहुंच देगा। इससे रोजगार बढ़ने, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होने और नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

भारत मंडपम में होगा हस्ताक्षर

समझौते पर पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के उनके समकक्ष टॉड मैक्ले की मौजूदगी में भारत मंडपम में हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

India–New Zealand FTA: व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

इस एफटीए का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। साथ ही, अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से भारत में करीब 20 अरब डॉलर के निवेश का रास्ता भी खुलेगा।

किन क्षेत्रों को होगा फायदा

समझौते के तहत भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जबकि न्यूजीलैंड के करीब 95% उत्पादों पर भारत में शुल्क में छूट या कमी दी जाएगी। इनमें ऊन, लकड़ी, समुद्री उत्पाद, फल और अन्य वस्तुएं शामिल हैं।

हालांकि भारत ने डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस दायरे से बाहर रखा है, ताकि घरेलू उद्योगों और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

India–New Zealand FTA: रोजगार और वीजा में राहत

समझौते की खास बात यह है कि न्यूजीलैंड हर साल 5,000 भारतीय पेशेवरों को अस्थायी वर्क वीजा देगा। आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ योग और आयुष से जुड़े पेशेवर भी इसका लाभ उठा सकेंगे।

रणनीतिक महत्व भी बड़ा

वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच यह समझौता भारत के लिए व्यापारिक विविधीकरण और आर्थिक मजबूती की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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