Punjab News: पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के उस फैसले का खुलकर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चल रही सुनवाई में शामिल न होने की बात कही है। यह पूरा मामला दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति केस से जुड़ा हुआ है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को लिखा पत्र
दरअसल, केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को एक पत्र लिखकर साफ कहा है कि उन्हें इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। इसी वजह से उन्होंने फैसला किया है कि वे न तो खुद कोर्ट में पेश होंगे और न ही अपने वकील के जरिए केस लड़ेंगे। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के ‘सत्याग्रह’ के रास्ते पर चलने वाला कदम बताया है। केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पूरी विनम्रता और न्यायपालिका के प्रति पूर्ण सम्मान के साथ, मैंने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को निम्नलिखित पत्र लिखा है, जिसमें उन्हें सूचित किया है कि गांधीवादी सिद्धांत ‘सत्याग्रह’ का पालन करते हुए, मेरे लिए उनके न्यायालय में इस मामले को आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा, चाहे मैं स्वयं उपस्थित होऊं या किसी वकील के माध्यम से। उन्होंने कहा कि यह कठिन निर्णय इस स्पष्ट निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद लिया है कि उनके न्यायालय में चल रही कार्यवाही, किसी भी रूप में, उस मूलभूत सिद्धांत को पूरा नहीं करती कि ‘न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए।’ इन कार्यवाहियों में मेरी भागीदारी, चाहे मैं स्वयं शामिल होऊं या किसी वकील के माध्यम से, किसी भी सार्थक परिणाम तक नहीं पहुंचेगी।
Justice must not only be done but must also be seen to be done” — this is not a preference, it is the bedrock of law. When even this is absent, withdrawing participation is not weakness. It is conscience speaking. Salute to this principled stand. 🙏#KejriwalKaSatyaGraha https://t.co/Y0HPNdmtAg
— Harjot Singh Bains (@harjotbains) April 27, 2026
इसी बयान को री-शेयर करते हुए हरजोत सिंह बैंस ने भी केजरीवाल के स्टैंड को सही ठहराया। उन्होंने लिखा कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। यह कोई पसंद नहीं, बल्कि कानून की बुनियाद है। जब यह भी न हो, तो अपनी भागीदारी वापस लेना कमजोरी नहीं है। यह अंतरात्मा की आवाज है। इस सैद्धांतिक रुख को सलाम। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने इस केस की सुनवाई से जज के खुद को अलग करने की मांग की थी। कोर्ट ने उस मांग को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद अब केजरीवाल ने यह नया रुख अपनाया है।
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