New Delhi: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का चौथी बार सत्ता में आने का सपना टूट गया, तो भाजपा भगवा परचम लहराने में सफल रही। ममता बनर्जी ने 15 साल राज्य में शासन किया, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में भाजपा उनके परंपरागत गढ़ों को धवस्त करने में सफल रही। कुछ राजनीतिक विश्लेषक राज्य में ममता की हार की मुख्य वजह हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण मान रहे हैं। वे मानते हैं कि हिंदू वोट भाजपा को पड़े, जबकि जो मुस्लिम वोट तृणमूल को पड़ते रहे, वे इस बार बंट गए। टीएमसी को अल्पसंख्यक मतदाताओं के भारी समर्थन की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ। यह सच है कि बंगाल में हिंदू वोट गोलबंद हुए, लेकिन इसके साथ ही कई ऐसे जमीनी मुद्दे हैं जिनके आधार पर भाजपा व्यूह रचना बनाने में सफल रही।
महिला आरक्षण विधेयक
संसद में महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक का गिर जाना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समेत कांग्रेस और वाम दलों के लिए काफी महंगा पड़ा।चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे पर मुखर रहे।विपक्षी पार्टियों को कटघरे में खड़ा करते रहे।इसका फायदा भाजपा को पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु में मिला।हालांकि टीएमसी, कांग्रेस और वाम दलों ने इस मुद्दे पर भाजपा के हमलों का यह कहकर जवाब दिया कि वह महिला आरक्षण की आड़ में भेदभावपूर्ण परिसीमन की प्रक्रिया लागू करना चाहती थी, लेकिन वे जनता को समझाने में सफल नहीं रहे। ऐसे में महिला आरक्षण को लेकर भाजपा की भावनात्मक अपील उसके लिए फायदेमंद साबित हुई।
New Delhi: भाजपा का बड़ा फोकस
देश की चुनावी राजनीति में महिला वोटर काफी महत्व रखते हैं। भाजपा कई राज्यों में इन वोटों पर फोकस करती रही है। पश्चिम बंगाल चुनाव में भी भाजपा ने टीएमसी की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की काट में महिलाओं को 36000 रुपये वार्षिक देने का दांव चला। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं को ₹3,000 मासिक सहायता, मुफ्त बस यात्रा और मातंगिनी हाजरा के नाम पर महिला बटालियन जैसे वादों से ममता के लिए चुनौती खड़ी की।
New Delhi: संदेशखाली का संदेश
पिछले कुछ सालों में संदेशखाली और आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं ने राज्य सरकार की महिला सुरक्षा की छवि को प्रभावित किया। भाजपा ने इस आंदोलन से जुड़े चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा। संदेशखाली आंदोलन की प्रमुख चेहरा रेखा पात्रा को हिंगलगंज सीट से और आरजी कर मामले में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को पानीहाटी सीट से भाजपा ने मैदान में उतार दिया।
New Delhi: भाजपा की व्यूह रचना
भाजपा की तरफ से इस बार बंगाल चुनाव पर खास नजर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की थी। शाह ने लगभग 15 दिन तक यहां कैंप कर लगातार रैलियां, रोड शो और खूब सारी बैठकें कीं। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर बूथों को मजबूत, मध्यम और कमजोर श्रेणियों में बांटा, जिसमें खास फोकस उन मध्यम बूथों पर रहा, जहां पिछली बार जीत-हार का अंतर बेहद कम था। इसके साथ इस बार उत्तर प्रदेश की तरह बंगाल में भी भाजपा ने सफल ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल को लागू किया। साथ ही यह संदेश दिया गया कि मुख्यमंत्री बंगाल का ही होगा। भाजपा ने राज्य के पूरे सिस्टम और ‘सिंडिकेट राज’ को निशाने पर लिया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का राज्य में हिंदू मतों को पार्टी पक्ष में करने में अहम योगदान रहा। योगी ने कई सफल जनसभाएं राज्य में की।
विकास का मुद्दा-भाजपा ने राज्य में विकास और रोजगार का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। युवाओं के बीच बेरोजगारी और बदलाव की राजनीति ने असर डाला है।
घुसपैठियों का मुद्दा- भाजपा ने चुनाव में अवैध घुसपैठियों को रोकने का वादा किया। बंगाल में अवैध रूप से रह रहे लोगों को 29 अप्रैल तक राज्य छोड़ने की चेतावनी दी। इसके लिए हाई-टेक बायोमेट्रिक प्रोफाइलिंग और दुर्गा सुरक्षा दस्ते का उपयोग कर सीमा सुरक्षा मजबूत करने की बात कही। इसका भी असर पड़ा।
सुरक्षा का अहसास-भाजपा ने राज्य की जनता को सुरक्षा का अहसास कराया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं अन्य नेताओं ने दो टूक कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद गुंडे बंगाल छोड़ देंगे।








