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केरल में UDF की ऐतिहासिक वापसी, कांग्रेस बनी सबसे बड़ी पार्टी; LDF का किला ढहा

Keralam results: केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) 63 सीटों के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है और गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। 140 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 71 है, जिसे UDF ने आराम से पार कर लिया।

LDF का किला ढहा, ऐतिहासिक हार

दो कार्यकाल से सत्ता में काबिज वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा। CPI(M) महज 26 सीटों पर सिमट गई, जबकि सहयोगी दल CPI को 8 सीटें मिलीं। यह नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि 1960 के दशक के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी भी भारतीय राज्य में वामपंथी दल सत्ता में नहीं हैं।

Keralam results: सहयोगी दलों का प्रदर्शन

चुनाव में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 22 सीटें जीतकर UDF की जीत में अहम भूमिका निभाई। केरल कांग्रेस को 7 सीटें और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को 3 सीटें मिलीं। भाजपा भी सिर्फ 3 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी, जो उसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

Keralam results: राहुल गांधी का धन्यवाद संदेश

UDF की जीत के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर केरल की जनता का आभार जताया। उन्होंने लिखा, “केरल में मेरे भाइयों और बहनों को इस निर्णायक जनादेश के लिए धन्यवाद।” पार्टी इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा राजनीतिक संकेत मान रही है।

एंटी-इंकंबेंसी बनी बड़ा फैक्टर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी ने साफ कहा कि ये नतीजे राज्य में सरकार विरोधी लहर को दर्शाते हैं। उनके मुताबिक, “10 साल के शासन में वामपंथी जनता की नब्ज नहीं समझ पाए। राहुल गांधी ने इस चुनाव में UDF को नई ऊर्जा दी।”

रियास ने बचाई साख

LDF की हार के बीच कुछ चेहरे ऐसे भी रहे जिन्होंने अपनी सीट बचा ली। पीडब्ल्यूडी और पर्यटन मंत्री पीए मोहम्मद रियास ने बेपूर सीट से जीत दर्ज की। उन्होंने 81,849 वोट हासिल कर अपने प्रतिद्वंदी को 7,487 वोटों से हराया।

सीधी टक्कर का चुनाव

Keralam results: इस बार का चुनाव मुख्य रूप से UDF और LDF के बीच सीधी लड़ाई रहा। कुल 883 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुकाबला दो बड़े गठबंधनों तक ही सीमित रहा। जनता ने स्पष्ट रूप से सत्ता परिवर्तन के पक्ष में वोट दिया।

 

 

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