Hormuz Crisis: मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती और कतर के प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने अमेरिका और ईरान से अपील की है कि मौजूदा संवेदनशील हालात में दोनों देश जिम्मेदारी और समझदारी के साथ कदम उठाएं।शनिवार को दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय तनाव और हालात पर विस्तार से चर्चा की गई।
दोनों नेताओं ने कहा कि किसी भी विवाद को खत्म करने के लिए कूटनीति और बातचीत ही सबसे सही रास्ता है।उन्होंने यह भी जोर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और उसका समर्थन करना बेहद जरूरी है। यह जानकारी मिस्र के विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई।
अमेरिका–ईरान वार्ता और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत की वर्तमान स्थिति पर भी विचार किया।उनका मानना है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए राजनीतिक समाधान को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि क्षेत्र के लोगों के संसाधनों और हितों की रक्षा हो सके।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
अट्ठाईस फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद आठ अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ।इसके बाद पाकिस्तान में भी लंबी शांति वार्ता हुई, लेकिन उससे कोई ठोस समझौता नहीं निकल सका।
कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्रों में तनाव फिर से बढ़ गया है।रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरानी जहाजों और तटीय इलाकों पर हमले किए, जबकि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई की।
Hormuz Crisis: ईरान की सेना का बड़ा सैन्य अभियान
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नौसेना ने शुक्रवार को बताया कि ईरानी सेना ने बड़े पैमाने पर संयुक्त सैन्य अभियान चलाया।इस अभियान में बैलिस्टिक मिसाइल, जहाज-रोधी क्रूज मिसाइल और विस्फोटक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ईरान का दावा है कि इन हमलों का निशाना अमेरिकी युद्धपोत थे।
ईरान ने यह भी कहा कि खुफिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी जहाजों को काफी नुकसान पहुंचा, जिसके बाद तीन अमेरिकी युद्धपोतों को होर्मुज क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा।
अमेरिकी सेना की प्रतिक्रिया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान के “बिना उकसावे वाले हमलों” को रोक दिया और आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की।उसका कहना है कि अमेरिका तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन अपनी सेना की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तीन अमेरिकी युद्धपोतों को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है।
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