Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में रविवार को दूसरी बार मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। दोपहर करीब 3:30 बजे 6 नए मंत्री शपथ लेंगे। इस विस्तार में समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले विधायक मनोज पांडेय को भी मंत्री बनाया जाएगा। इसके अलावा भूपेंद्र चौधरी, सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत के नाम भी तय हो चुके हैं।इस बार मंत्रिमंडल में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को संतुलित करने की कोशिश की गई है। नए मंत्रियों में 1 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 2 दलित चेहरे शामिल हैं।

राज्यपाल को सौंपी गई मंत्रियों की सूची
शनिवार शाम करीब साढ़े 6 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मिलने पहुंचे। दोनों के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने नए मंत्रियों की सूची राज्यपाल को सौंप दी।
वहीं, रविवार को शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री योगी लोकभवन में फिल्म ‘कृष्णावतारम’ भी देखेंगे। इस कार्यक्रम में योगी मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के मौजूद रहने की संभावना है। इसके लिए सभी मंत्रियों को सूचना भेज दी गई है।
फिलहाल यूपी सरकार में मुख्यमंत्री योगी समेत कुल 54 मंत्री हैं। इससे पहले योगी 2.0 सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार लोकसभा चुनाव 2024 से पहले 5 मार्च 2024 को हुआ था।
Cabinet Expansion: जानिए कौन-कौन बन सकता है मंत्री

1. भूपेंद्र सिंह चौधरी
भूपेंद्र सिंह चौधरी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। वे मुरादाबाद के रहने वाले हैं और लंबे समय से संघ और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं।
साल 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने और वर्तमान में भी एमएलसी हैं। 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था। बाद में 2019 में वे कैबिनेट मंत्री बने।
2. मनोज पांडेय
मनोज पांडेय रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं। वे 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 2022 में सपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे और विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक भी रहे।अवध और पूर्वांचल क्षेत्र में उन्हें बड़े ब्राह्मण नेता के रूप में देखा जाता है।
3. कृष्णा पासवान
फतेहपुर जिले की खागा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक कृष्णा पासवान का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में की थी।वे चार बार विधायक और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। भाजपा उन्हें दलित समाज और महिला नेतृत्व के मजबूत चेहरे के तौर पर देखती है।
4. सुरेंद्र दिलेर
अलीगढ़ जिले की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर भाजपा के युवा दलित नेताओं में गिने जाते हैं। वे पूर्व भाजपा सांसद राजवीर सिंह दिलेर के बेटे हैं।उनके परिवार की राजनीति में लंबी पकड़ रही है। उनके दादा किशन लाल दिलेर 6 बार विधायक और 4 बार सांसद रहे थे। वहीं उनके पिता भी सांसद और विधायक रह चुके हैं।
5. हंसराज विश्वकर्मा
हंसराज विश्वकर्मा भाजपा के एमएलसी हैं और पिछड़ा वर्ग की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे पिछले 34 साल से राजनीति में सक्रिय हैं।
उन्होंने 1989 में बूथ स्तर से राजनीतिक सफर शुरू किया था और राम मंदिर आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। 2019 लोकसभा चुनाव और 2022 विधानसभा चुनाव में वाराणसी में भाजपा की बड़ी जीत में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है।वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार में भी सक्रिय रहे हैं।
6. कैलाश सिंह राजपूत
कैलाश सिंह राजपूत ने 1996 में पहली बार भाजपा उम्मीदवार के रूप में तिर्वा सीट से जीत दर्ज की थी। बाद में 2007 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और विधायक बने।2017 में वे फिर भाजपा में लौटे और चुनाव जीते। 2022 विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कन्नौज की तिर्वा सीट से जीत हासिल की।
ब्राह्मण नाराजगी को साधने की कोशिश
हाल के दिनों में शंकराचार्य विवाद, UGC के नए नियम और पुलिस भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े विवाद के बाद ब्राह्मण समाज में नाराजगी की चर्चा रही है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा सरकार और संगठन की एक समन्वय बैठक में संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर करने पर जोर दिया था।
फिलहाल योगी सरकार में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत कुल 7 ब्राह्मण मंत्री हैं। पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद के सांसद और केंद्रीय मंत्री बनने के बाद ब्राह्मण कोटे की एक जगह खाली थी। अब इस सीट पर मनोज पांडेय को मौका दिया जा रहा है।
दलित वर्ग को भी बड़ा संदेश
इस विस्तार में सुरेंद्र दिलेर और कृष्णा पासवान को शामिल करके भाजपा ने दलित समाज को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है।अभी योगी सरकार में बेबीरानी मौर्य समेत कुल 8 दलित मंत्री हैं। यूपी विधानसभा की 86 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें 84 सीटें एससी और 2 सीटें एसटी वर्ग के लिए हैं। इनमें से 67 विधायक भाजपा के हैं।
महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने पर फोकस
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 51 महिला विधायक हैं। इनमें भाजपा की 30, अपना दल (एस) की 4 और रालोद की 1 विधायक शामिल हैं।फिलहाल योगी सरकार में 5 महिला मंत्री हैं। भाजपा महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृष्णा पासवान को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।
पिछड़े वर्ग पर भी खास ध्यान
योगी सरकार में पहले से ही पिछड़े वर्ग से कई बड़े नेता मंत्री हैं। इनमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह, धर्मपाल सिंह, राकेश सचान, अनिल राजभर, दारा सिंह चौहान और लक्ष्मी नारायण शामिल हैं।इसके अलावा सहयोगी दलों से आशीष पटेल, ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद भी पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।अब नए विस्तार में भी 3 ओबीसी चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें भूपेंद्र चौधरी, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत के नाम प्रमुख हैं।
योगी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में 5 मार्च 2024 को चार नेताओं को मंत्री बनाया गया था।इनमें सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर, भाजपा में शामिल हुए दारा सिंह चौहान, रालोद कोटे से अनिल कुमार और भाजपा के सुनील शर्मा को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी।
अखिलेश यादव ने कसा तंज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कैबिनेट विस्तार को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “क्या दिल्ली से पर्ची आ गई है? मुख्यमंत्री की ताकत कम की जा रही है। जिनका मंत्रिमंडल है, उनसे भी पूछ लेना चाहिए।”उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सिर्फ रील बनाएगी या जनता के लिए कुछ काम भी करेगी।
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