New Delhi: देशभर में 3 मई को आयोजित की गई, मेडिकल की नीट यूजी परीक्षा हालांकि रद्द कर दी गई है, जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है, लेकिन इस परीक्षा के पेपर लीक होने से तमाम सवाल उठे हैं। सबसे बड़ा सवाल परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर है।जो लाखों छात्र सालभर से इस परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए थे, परीक्षा रद्द होने पर उन छात्रों व उनके अभिभावकों को मानसिक व आर्थिक रूप से जो बड़ा झटका लगा उसकी जवादेही किसकी है ? क्या गारंटी है कि भविष्य में पेपर लीक नहीं होंगे ?
क्या चाहते हैं छात्र ?
छात्रों का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों से जांच करवाई जाए व इसमें संलिप्त व्यक्तियों, परीक्षा-माफियाओं व किसी भी स्तर पर सहयोग करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जांच पूर्ण होने तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पूरे प्रकरण में पारदर्शिता बनाए रखते हुए विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के समक्ष तथ्य स्पष्ट करे।
New Delhi: कैसे कहां से कहां पहुंचा ‘गेस पेपर’ ?
बताया जाता है कि शुरुआती जांच में पता चला है कि पेपर लीक करने वालों का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। इस नेटवर्क से जुड़े लोगों ने परीक्षा से करीब एक महीने पहले ही विभिन्न जगहों पर वह ‘गेस पेपर’ पहुंचा दिया था, जिसमें छपे कई सवाल परीक्षा प्रश्नपत्र में थे। बताया जाता है कि नासिक के एक प्रिंटिंग प्रेस में इस गेस पेपर की छपाई की गई थी। इसके बाद यह पेपर हरियाणा के गुरुग्राम होते हुए राजस्थान भेजा तक पहुंचा। जांच एजेंसियों के अनुसार, गेस पेपर में बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 42 सवाल हू-ब-हू परीक्षा में पूछे गए थे।
New Delhi: एक व्यक्ति हिरासत में, 45 से पूछताछ
बताया जाता है कि नासिक क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही देशभर में 45 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि गेस पेपर लाखों रुपये में बेचे गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार नासिक से शुरू हुआ यह नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान के जूमवारामगढ़ और सीकर होते हुए जम्मू-कश्मीर और बिहार तक फैला हुआ था। सीबीआई इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच करेगी।








