Premanand Maharaj & Bitta: मनिंदर सिंह बिट्टा ने वृंदावन में रसिक संत प्रेमानंद महाराज जी से मुलाकात की। इस दौरान बिट्टा भावुक नजर आए और उन्होंने कहा कि जीवन में उन्होंने संघर्ष, आतंक और जवानों की शहादत बहुत करीब से देखी है, लेकिन आज भी जीवित रहना ईश्वर और संतों की कृपा है।
रमणरेती स्थित केली कुंज आश्रम में हुई मुलाकात के दौरान बिट्टा ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सभी इच्छाएं पूरी हो चुकी हैं और वह अपनी किडनी भी संत प्रेमानंद महाराज को समर्पित करना चाहते हैं। जिससे तमाम मीडिया समूह को अपनी ओर खीच लिया जो वास्तव में आकर्षण का केंद्र भी बना।
प्रेमानंद महाराज ने विनम्रता से ठुकराया प्रस्ताव
बिट्टा की बात सुनकर संत प्रेमानंद महाराज ने उन्हें साधुवाद दिया, लेकिन किडनी लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने संकल्प लिया है कि किसी के शरीर का एक बूंद खून भी अपने शरीर में नहीं लेंगे।बताया जाता है कि प्रेमानंद महाराज लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं और नियमित डायलिसिस पर हैं। इससे पहले भी कई नामी हस्तियां उन्हें किडनी दान करने की पेशकश कर चुकी हैं।
Premanand Maharaj & Bitta: ‘अब सब देख लिया… राम मंदिर भी बन गया’
दो दिन की ब्रज यात्रा पर आए बिट्टा ने कहा कि उन्होंने जीवन में बहुत कुछ देखा है। उन्होंने कहा कि धारा 370 हट चुकी है, घर-घर तिरंगा लहरा रहा है और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी हो चुका है। जिन चीजों की कभी उम्मीद नहीं थी, वह भी अब पूरी हो चुकी हैं।
Premanand Maharaj & Bitta: सनातन बोर्ड की मांग को दिया समर्थन
वृंदावन दौरे के दौरान बिट्टा ने कथावाचक Devkinandan Thakur से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सनातन बोर्ड गठन की मांग का समर्थन किया। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि सरकार को इस दिशा में जल्द फैसला लेना चाहिए और उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले सनातन बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए।

‘जिंदा शहीद’ के नाम से जाने जाते हैं बिट्टा
मनिंदरजीत सिंह बिट्टा आतंकवाद विरोधी मोर्चे के प्रमुख हैं और उन्हें ‘जिंदा शहीद’ के नाम से भी जाना जाता है। 1990 के दशक में उन पर कई बार जानलेवा हमले हुए थे। 14 बम हमलों में घायल होने के बावजूद वे लगातार आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं।








