IRGC Navy: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कोर की नौसेना ने समुद्री निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। पिछले 24 घंटों के दौरान कम से कम 25 व्यापारिक और तेल जहाजों को कड़ी सुरक्षा के बीच इस अहम समुद्री मार्ग से सुरक्षित निकाला गया। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक, आईआरजीसी नौसेना ने इन जहाजों की आवाजाही पर पूरी निगरानी रखते हुए उन्हें सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ती सैन्य सक्रियता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
समुद्री मार्ग पर ईरान की सख्त निगरानी
आईआरजीसी नौसेना के अनुसार, शुक्रवार को 35 जहाजों ने उसकी निगरानी में इस मार्ग को पार किया था, जबकि गुरुवार को यह संख्या 31 रही। सप्ताह की शुरुआत में 26 वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों से साफ है कि ईरान इस समुद्री क्षेत्र में अपनी सैन्य और परिचालन क्षमता का लगातार प्रदर्शन कर रहा है। अब बिना आधिकारिक अनुमति और सुरक्षा मंजूरी के किसी भी जहाज का इस मार्ग से गुजरना लगभग असंभव हो गया है।
IRGC Navy: अमेरिका-इजरायल तनाव के बाद बदले हालात
अमेरिका और इजरायल के साथ हालिया तनाव और संघर्ष के बाद इस क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। युद्धविराम की घोषणा के बावजूद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण और अधिक मजबूत कर लिया है। तेहरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह अपने विरोधी देशों के जहाजों को इस समुद्री मार्ग में प्रवेश नहीं करने देगा। इसके अलावा अन्य विदेशी जहाजों के लिए भी पारगमन शुल्क लागू करने की नीति अपनाई गई है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ‘चोकपॉइंट’ माना जाता है। वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का करीब 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ती सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा प्रतिबंधों का सीधा असर दुनिया भर के देशों की ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस समुद्री मार्ग के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीतिक ताकत और प्रभाव का खुला प्रदर्शन कर रहा है।








