Delhi Gymkhana Club: सरकार ने नोटिस दिया है कि 27 एकड़ पर खड़े जिमखाना क्लब को 12 दिन के भीतर खाली कर दिया जाए। जिसने भी इस समाचार को सुना और देखा, उन्हें आश्चर्य हुआ कि 113 वर्ष और 23 दिन वाले किरायेदार को सिर्फ 12 दिन की मोहलत दी गयी खाली करने के लिए।
यह जमीन लीज पर क्लब को दी गई थी। सालान लीज एक हजार रुपये की है। जब यह क्लब बना था, तब ब्रिटिश सरकार ने अपने आफिसर्स के लिए मिलने का एक प्वाइंट बनाया था। तभी से ऐसी परंपरा चली कि देश के आजाद होने के बावजूद, इस भूमि में बने क्लब की पंरपंरा को चलने दिया गया। आज की तारीख तक जिमखाना क्लब की धार उसी तरह की है, जैसे ब्रिटिश काल के आफिसर्स की हुआ करती थी। सभी तरह के साधन इस क्लब में हैं। इसका एक नजरिया आज भी है।
सदस्यता आसानी से नहीं मिलती
क्लब की मेंबरशिप आसानी से नहीं मिलती क्योंकि क्लब ने नये सदस्यों के लिए कोटा फिक्स कर रखा है। जिसमें 40 प्रतिशत सिविल सर्विसेस के और 40 प्रतिशत डिफेंस के सदस्य होगंे और बाकी अन्य बीस प्रतिशत में एकदम किसी बाहरी सदस्य के लिए सदस्यता पाना आसान नहीं है। जो बाहरी व्यक्ति सदस्यता के लिए आवेदन करता है उसे आसानी से सदस्यता नहीं मिल पाती क्योंकि जिन सदस्यों ने आवेदन किया हुआ है, वे ही 40 साल से वेटिंग में हंै, उन्हें सदस्यता पाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इसका एक प्रमाण मेरे पास भी है। मेरे एक मित्र मिस्टर गुप्ता जिमखाने के सदस्य बनना चाहते थे। उन्होंने मेरे से जिक्र किया, मैंने आश्वासन दिया कि मैं आपकी सदस्यता के लिए कोशिश करूंगा। वे मान गये, उनकी वेटिंग लिस्ट को लेकर मैं क्लब के अधिकारियों के पास गया, उन्होंने मुझे कहा कि यदि सदस्य 7 लाख रुपये अग्रिम दे दें, तो उन्हें सदस्यता मिल जाएगी। मैंने भी उनके खुशी-खुशी 7 लाख रुपये जमा करवा दिए। लेकिन जमा करवाने के बाद अधिकारी का जवाब था कि अभी भी हम कह नहीं सकते हैं कि
सदस्यता जल्दी मिल पाएगी। इस स्थिति से मिस्टर गुप्ता ठंडे पड़ गये कि पता नहीं और कितने साल जिमखाने की सदस्यता के लिए रुकना पड़ेगा। उनकी स्थिति को देखकर जमा किए हुए उनके पैसे वापस ले लिए। कहने का मतलब यह है कि बाहरी व्यक्ति के लिए जिमखाने के दरवाजे खुले नहीं हैं। सिर्फ सरकारी उच्च अधिकारी और डिफेंस के उच्च अधिकारी ही क्लब के सदस्य रहेंगे। और अन्य में उनके बच्चों के लिए ही सदस्यता मिलने की गुंजाइश है।
अब हर किसी को लगता है कि यह क्लब एक केंद्र बना हुआ है बड़ी-बड़ी डील करवाने का। क्योंकि सिविल सर्विसेस और डिफेंस के उच्च अधिकारी ही ब्रिटिशकाल की ऐसी कार्यशैली को यह जिमखाना क्लब दिखाता है।
सरकार की प्राथमिकता में क्लब नहीं है
सरकार की प्राथमिकता में यह जिमखाना क्लब नहीं है, नहीं तो इतनी तेजी से इस क्लब को खाली करवाने में नहीं होती। अब आगे समय ही बताएगा कि यह क्लब और कितने समय तक इस लुटियंस जोन पर रहेगा। क्लब के सदस्य भी कोर्ट चले गये हैं, वह भी अपनी बात रखेंगे। तभी कोर्ट कोई फैसला दे पायेगा।
-भगवती प्रसाद डोभाल
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