‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बिग बुक, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड और बालवाटिका पुस्तिका जैसी सामग्री के माध्यम से अब लाखों नौनिहालों को शुरुआती शिक्षा का नया और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
बालवाटिकाओं में दी जा रही शिक्षण सामग्री
जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में आयु वर्ग के अनुसार शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत ‘चहक-1’, ‘चहक-2’, ‘चहक-3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बालवाटिका हस्तपुस्तिका, 12 प्रकार की बिग बुक, होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड और शिक्षण तालिकाएं वितरित की जाएंगी।
Lucknow: शिक्षा अभियान पर फोकस
3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी कारण गतिविधि-आधारित, खेल-आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘चहक’ श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा विकास, बोलने-सुनने की क्षमता और बुनियादी सीखने की दक्षताओं को विकसित करेंगी। वहीं ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री बच्चों के बौद्धिक विकास, रचनात्मकता, जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही बिग बुक और टीचर गाइड के माध्यम से ईसीसीई एजुकेटर्स और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ा जाएगा।
Lucknow: व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही
उत्तर प्रदेश में पहली बार प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने बड़े स्तर पर संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। अभी तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था में अधिकतर फोकस प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं पर रहता था, लेकिन अब बच्चों की शुरुआती सीखने की अवस्था को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। अब शिक्षा सुधार बच्चों की सीखने की बुनियाद को मजबूत करने की दिशा में गंभीरता से काम किया जा रहा है।








