CJP X Account Ban: राजनीति और सोशल मीडिया की दुनिया में तेजी से चर्चा बटोर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा। अदालत ने पार्टी के एक्स अकाउंट को तत्काल बहाल करने की मांग को मानने से इनकार कर दिया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव की अदालत में हुई, जहां पार्टी की ओर से अभिजीत दीपके ने अपनी दलीलें रखीं।दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रही थी। युवाओं के बीच इस संगठन ने खुद को एक “डिजिटल विरोध आंदोलन” के तौर पर पेश किया और अपने अनोखे प्रतीकों, तीखे नारों और आक्रामक ऑनलाइन कैंपेन के जरिए तेजी से पहचान बनाई। लेकिन 21 मई को अचानक पार्टी का आधिकारिक एक्स हैंडल भारत में ब्लॉक कर दिया गया, जिसके बाद मामला सीधे अदालत तक पहुंच गया।
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान पार्टी की तरफ से कहा गया कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम है और उसे बिना स्पष्ट कारण के ब्लॉक करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल तत्काल बहाली का आदेश देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की प्रक्रिया और तथ्यों को विस्तार से देखने की जरूरत है, इसलिए इस स्तर पर कोई जल्दबाजी में आदेश नहीं दिया जा सकता।अदालत के इस रुख को CJP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी का पूरा अभियान सोशल मीडिया और डिजिटल सपोर्ट बेस पर टिका हुआ है।
CJP X Account Ban:‘कॉकरोच इज बैक’ से फिर लौटे समर्थक
हालांकि एक्स अकाउंट ब्लॉक होने के बाद भी पार्टी समर्थकों का उत्साह कम नहीं हुआ। ब्लॉकिंग के कुछ ही घंटों बाद “Cockroach Is Back” नाम से नया हैंडल सामने आया, जिसने बेहद कम समय में लाखों लोगों का ध्यान खींच लिया। मौजूदा समय में इस अकाउंट के 2 लाख 27 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। सोशल मीडिया पर समर्थक खुद को “कॉकरोच मूवमेंट” का हिस्सा बताते हुए लगातार पोस्ट और कैंपेन चला रहे हैं।डिजिटल दुनिया में यह पूरा अभियान अब एक राजनीतिक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है, जहां मीम, व्यंग्य और आक्रोश को मिलाकर युवाओं तक पहुंच बनाई जा रही है।
CJP X Account Ban:कैसे हुई थी CJP की शुरुआत?
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत 16 मई को हुई थी। इस संगठन को अभिजीत दीपके लीड कर रहे हैं, जो पहले आम आदमी पार्टी से भी जुड़े रह चुके हैं। पार्टी का दावा है कि वह युवाओं की आवाज को मजबूत करने, सिस्टम से सवाल पूछने और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए एक स्वतंत्र मंच तैयार कर रही है।हाल के दिनों में CJP ने शिक्षा व्यवस्था और कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला था। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सोशल मीडिया पर बड़ा अभियान भी चलाया।
चीफ जस्टिस की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की कॉकरोच और परजीवी वाली टिप्पणियां चर्चा में आ गईं। इन टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर भारी बहस छिड़ गई और उसी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी अस्तित्व में आई।हालांकि बाद में चीफ जस्टिस ने खुद स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणियां युवाओं के खिलाफ नहीं थीं, बल्कि उन लोगों के लिए थीं जो फर्जी और अवैध डिग्रियों के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया के एक हिस्से ने उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया।
सोशल मीडिया की राजनीति या नई बगावत?
कॉकरोच जनता पार्टी अब सिर्फ एक सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं रह गई है, बल्कि यह धीरे-धीरे एक डिजिटल राजनीतिक नैरेटिव में बदलती दिखाई दे रही है। युवाओं के गुस्से, सिस्टम के खिलाफ नाराजगी और इंटरनेट की ताकत को मिलाकर बना यह अभियान आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। हालांकि हाईकोर्ट से मिली शुरुआती निराशा ने फिलहाल CJP की रफ्तार पर ब्रेक जरूर लगाया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके समर्थकों का जोश अभी भी कम होता नजर नहीं आ रहा।
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