West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मिजोरम के महाधिवक्ता बिस्वजीत देब ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद लोकसभा चुनाव हुए होते तो पार्टी को नौ सीटें भी नहीं मिल पातीं। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
आरजी कर प्रकरण को बताया सबसे बड़ा कारण
बिस्वजीत देब ने कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला चिकित्सक के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना ने जनता के बीच सरकार की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया। उनके अनुसार इस मामले को प्रभावी ढंग से संभालने में सरकार विफल रही। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस घटना को लेकर आक्रोश देखने को मिला और जनता ने इसे गंभीरता से लिया। देब का मानना है कि यदि लोकसभा चुनाव इस घटना के बाद हुए होते तो तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन और भी खराब रहता।
West Bengal: भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर उठाए सवाल
वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ा और जनता में असंतोष गहराता गया। उन्होंने कहा कि कई मंत्री, सांसद और विधायक विवादों में घिरे, फिर भी उन्हें दोबारा अवसर दिया गया। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों लोगों की नौकरियां प्रभावित हुईं, लेकिन सरकार प्रभावी समाधान नहीं निकाल सकी। इससे आम जनता का विश्वास कमजोर हुआ।
संगठन और नेतृत्व पर भी साधा निशाना
बिस्वजीत देब ने पार्टी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की कमी रही। उनके अनुसार राजनीतिक संगठन को जनसंपर्क के बजाय एक कॉर्पोरेट ढांचे की तरह चलाने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ फैसलों और बयानों से समाज के विभिन्न वर्गों में असंतोष बढ़ा। देब ने संकेत दिया कि वह आने वाले दिनों में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं, जिससे पार्टी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।








