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‘दिल में बाबर, मुंह में राम…’ मथुरा में लगे होर्डिंग से गरमाई सियासत, सपा नेताओं ने पोस्टर फाड़ किया विरोध

CM के बयान के बाद मथुरा में लगे विवादित होर्डिंग

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की सियासत लगातार गर्म होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हनुमानगढ़ी और जामा मस्जिद को लेकर दिए गए बयान के बाद अब मथुरा में विवादित होर्डिंग लगाए जाने से राजनीतिक माहौल और तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने इसे भाजपा की चुनावी रणनीति बताते हुए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है।

मथुरा में गोवर्धन चौराहा के आसपास 8 जगह इस तरह के होर्डिंग लगाए गए हैं। - Dainik Bhaskar

हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का पाप

मंगलवार सुबह मथुरा के गोवर्धन चौराहा, एफसीआई गोदाम समेत शहर के कई प्रमुख स्थानों पर विवादित होर्डिंग लगे मिले। इन होर्डिंग में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का आरोप लगाते हुए कई राजनीतिक टिप्पणियां लिखी गई थीं। इनमें सपा-कांग्रेस ने हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का पाप किया और ‘दिल में बाबर, मुंह में राम’ जैसे नारे भी लिखे गए थे।

सपा ने होर्डिंग फाड़कर किया विरोध 

होर्डिंग में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव की तस्वीरों के साथ पुराने बयानों का भी उल्लेख किया गया था। साथ ही कुछ अखबारों और टीवी चैनलों की कटिंग लगाकर विभिन्न दावों को प्रस्तुत किया गया। राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव के एक पुराने बयान का भी जिक्र किया गया, जिसके समर्थन में भी मीडिया रिपोर्टों की कटिंग लगाई गई थीं। मामले की जानकारी मिलते ही समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और होर्डिंग फाड़कर अपना विरोध दर्ज कराया। सपा नेताओं का आरोप है कि विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए भाजपा धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों को उछालकर चुनावी ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के विवाद खड़े कर रही है।

वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राम मंदिर, धार्मिक स्थलों, आस्था और पहचान से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चुनावी विमर्श के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि आगामी चुनाव में विकास, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विषय भी प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बन सकते हैं। फिलहाल विवादित होर्डिंग को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह विवाद उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में कितना असर डालता है, इस पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।

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