Rocket blast: अमेरिकी अरबपति जेफ बेजोस की अंतरिक्ष कंपनी ब्लू ओरिजिन को एक बड़ा झटका लगा है। कंपनी के भारी-भरकम रॉकेट ‘न्यू ग्लेन’ में ग्राउंड टेस्ट के दौरान बड़ा तकनीकी हादसा हो गया। फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन पर हुए इस टेस्ट के दौरान रॉकेट लॉन्चपैड पर ही फट गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ब्लू ओरिजिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि यह एक “हॉटफायर टेस्ट” था, जिसमें रॉकेट के इंजनों को लॉन्च से पहले जांचा जा रहा था। इसी दौरान रॉकेट में असामान्य स्थिति पैदा हो गई और धमाका हो गया।
जेफ बेजोस बोले- सभी कर्मचारी सुरक्षित
ब्लू ओरिजिन के संस्थापक जेफ बेजोस ने हादसे के बाद बयान जारी करते हुए कहा कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा, “अभी हादसे की असली वजह बताना जल्दबाजी होगी, लेकिन हमारी टीम जांच में जुट गई है। यह दिन काफी मुश्किल रहा, लेकिन हम जरूरी मरम्मत करेंगे और फिर से उड़ान भरेंगे।”
Rocket blast: अप्रैल में भी मिशन के दौरान आई थी दिक्कत
यह पहली बार नहीं है जब न्यू ग्लेन रॉकेट को लेकर परेशानी सामने आई हो। इससे पहले 19 अप्रैल 2026 को इसकी तीसरी उड़ान के दौरान भी तकनीकी खराबी आ गई थी। उस मिशन में रॉकेट का पहला चरण सफलतापूर्वक समुद्र में मौजूद प्लेटफॉर्म पर उतर गया था, लेकिन दूसरा चरण अपने सैटेलाइट पेलोड को सही कक्षा में नहीं पहुंचा सका था। उस समय अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (FAA) ने मामले की जांच शुरू की थी।
Rocket blast: FAA ने क्या कहा?
FAA ने बयान जारी कर कहा कि 28 मई की रात केप कैनावेरल स्थित लॉन्च कॉम्प्लेक्स में स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान यह घटना हुई। हालांकि यह टेस्ट FAA लाइसेंस प्राप्त गतिविधियों के दायरे में नहीं आता था और हवाई यातायात पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
नासा ने भी जताई चिंता
नासा के प्रमुख जेरेड आइजैकमान ने कहा कि अंतरिक्ष मिशन बेहद जोखिम भरे होते हैं और भारी रॉकेट तकनीक विकसित करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि नासा इस हादसे की पूरी जानकारी रख रहा है और ब्लू ओरिजिन के साथ मिलकर जांच करेगा।
न्यू ग्लेन रॉकेट का अब तक का सफर
Rocket blast: ब्लू ओरिजिन का पहला ऑर्बिटल रॉकेट ‘न्यू ग्लेन’ पहली बार 16 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया था। इसकी शुरुआती उड़ान सफल रही थी, लेकिन कंपनी रॉकेट के बूस्टर को समुद्री प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित उतारने का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई थी। बाद में कंपनी ने बताया था कि इंजन दोबारा सही तरीके से चालू नहीं हो पाए थे।
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