Lalu Yadav: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने से साफ इंकार कर दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट से लालू यादव की जमानत रद्द करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने हाई कोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हाई कोर्ट के फैसले में दखल नहीं देना चाहता, क्योंकि उस आदेश को आए करीब सात साल हो चुके हैं। अदालत ने बताया कि सीबीआई की यह अपील वर्ष 2018 से लंबित है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह लालू यादव से जुड़े मामले की सुनवाई जल्द पूरी करे।
CBI की दलील क्या थी?
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने कहा कि लालू यादव की जमानत याचिका पहले दो बार खारिज हो चुकी थी। बाद में हाई कोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दे दी कि उन्होंने अपनी 50 प्रतिशत सजा पूरी कर ली है। सीबीआई का कहना था कि यह आधार सही नहीं था, क्योंकि इस मामले में सजा एक साथ चलने वाली (Concurrent Sentence) नहीं थी। इस पहलू पर पर्याप्त विचार किए बिना जमानत दी गई।

क्या है देवघर चारा घोटाला मामला?
पीटीआई के अनुसार, यह मामला बिहार के अलग-अलग जिलों में सरकारी खजाने से फर्जीवाड़े के जरिए सार्वजनिक धन की अवैध निकासी से जुड़ा है। चारा घोटाला पहली बार जनवरी 1996 में पशुपालन विभाग में हुई छापेमारी के बाद सामने आया था। इसके बाद जून 1997 में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव को इस मामले में आरोपी बनाया।
950 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ा मामला
राजद अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को लगभग 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े पांच अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें जेल की सजा भी मिली है। यह घोटाला वर्ष 1992 से 1995 के बीच हुआ था। उस समय लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे और उनके पास वित्त एवं पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी भी थी। उस दौरान बिहार का विभाजन नहीं हुआ था।चारा घोटाले में दोषी ठहराए गए चर्चित नेताओं में लालू प्रसाद यादव भी शामिल हैं। फिलहाल वह खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर बाहर हैं।
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