Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता ऋतब्रता बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस ने बागी विधायक दल के दावे को स्वीकार करते हुए उन्हें विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी सौंपी। इस फैसले को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
59 विधायकों के समर्थन का दावा
ऋतब्रता बनर्जी बुधवार सुबह विधानसभा पहुंचे और दावा किया कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 59 का समर्थन प्राप्त है। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उनके नेतृत्व वाले बागी गुट को मान्यता प्रदान कर दी। साथ ही विधानसभा परिसर में विपक्ष के लिए आवंटित कार्यालय की चाबियां भी उन्हें सौंप दी गईं। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर किया है।
Mamata Banerjee: ममता बनर्जी को सलाहकार बनाने का प्रस्ताव
विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिलने के बाद ऋतब्रता बनर्जी ने कहा कि वे ममता बनर्जी से विपक्षी मोर्चे की मुख्य सलाहकार बनने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा के संदर्भ में अभिषेक बनर्जी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। ऋतब्रता ने आरोप लगाया कि पहले जाली दस्तावेजों के साथ एक पत्र भेजा गया था और यदि ऐसे आरोप साबित होते हैं तो विधानसभा अध्यक्ष आवश्यक संवैधानिक कदम उठा सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
तृणमूल कांग्रेस ने जारी रखी राजनीतिक सक्रियता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस ने अपने राजनीतिक संघर्ष को जारी रखने की बात कही है। पार्टी नेता प्रसून बनर्जी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ उनकी वैचारिक लड़ाई पहले की तरह जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर वे एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका भी निभाएंगे। वहीं कोलकाता में ममता बनर्जी ने अपने आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें अभिषेक बनर्जी, कुणाल घोष और डेरेक ओ’ब्रायन सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। माना जा रहा है कि बैठक में पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
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