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5,300 साल पुरानी ‘ओत्जी द आइसमैन’ ममी में आज भी जिंदा हैं सूक्ष्म जीव, वैज्ञानिकों की रिसर्च में बड़ा खुलासा

5300 Year Old Mummy:

5300 Year Old Mummy: वैज्ञानिकों ने 5,300 साल पुरानी प्रसिद्ध ममी ‘ओत्जी द आइसमैन’ के शरीर में मौजूद सूक्ष्म जीवों यानी माइक्रोबायोम का अध्ययन कर एक बड़ा खुलासा किया है। रिसर्च में पता चला है कि ममी के शरीर में मौजूद कई सूक्ष्म जीव आज भी पहचानने योग्य अवस्था में मौजूद हैं और समय के साथ उनमें जैविक बदलाव भी हुए हैं।

ओत्जी द आइसमैन की ममी साल 1991 में यूरोप के आल्प्स पर्वतीय क्षेत्र में बर्फ के भीतर मिली थी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह व्यक्ति करीब 5,300 साल पहले जीवित था। बर्फ में सुरक्षित रहने की वजह से उसका शरीर बेहद अच्छी स्थिति में मिला, जिससे प्राचीन मानव जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।

क्या होता है माइक्रोबायोम?

माइक्रोबायोम शरीर में मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीवों का समूह होता है। ये जीव पाचन, इम्यून सिस्टम और शरीर के कई जरूरी कार्यों में अहम भूमिका निभाते हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में माइक्रोबायोम को स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

5300 Year Old Mummy: हजारों साल बाद भी सुरक्षित मिले सूक्ष्म जीव

नई रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने ओत्जी के शरीर और पाचन तंत्र से लिए गए नमूनों की जांच की। इस दौरान कई ऐसे सूक्ष्म जीव मिले जो हजारों साल बाद भी संरक्षित अवस्था में मौजूद हैं। कुछ माइक्रोब्स में समय के साथ हुए विकास और जैविक बदलावों के संकेत भी मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर इतने लंबे समय बाद सूक्ष्म जीव पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, लेकिन इस अध्ययन से साबित हुआ है कि खास परिस्थितियों में माइक्रोबायोम लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है।

5300 Year Old Mummy: प्राचीन जीवनशैली और बीमारियों पर मिले संकेत

पिछले अध्ययनों में पता चला था कि ओत्जी किसान समुदाय से जुड़ा हो सकता था। उसके शरीर पर टैटू भी पाए गए थे और वह कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। वैज्ञानिकों को उसके पेट में मांस और अनाज के अवशेष भी मिले थे, जिससे उसके खानपान की जानकारी मिली। अब माइक्रोबायोम स्टडी से यह समझने में मदद मिल रही है कि प्राचीन इंसानों के शरीर में मौजूद सूक्ष्म जीव आधुनिक मानवों से कितने अलग थे।

मानव विकास को समझने में मिलेगी मदद

वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन माइक्रोबायोम का अध्ययन मानव विकास, बीमारियों और स्वास्थ्य के बीच संबंधों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा। इससे यह भी पता लगाया जा सकेगा कि हजारों वर्षों में मानव शरीर के अंदर रहने वाले सूक्ष्म जीवों में किस तरह बदलाव आया।

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